पिता का साया उठा, मां ने नहीं टूटने दिया हौसला; BPSC में 85वीं रैंक लाकर SDM बनीं श्वेता भारती

नालंदा: बिहार के नालंदा जिले की बेटी श्वेता भारती ने संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर वह मुकाम हासिल किया है, जिसका सपना लाखों युवा देखते हैं। BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 85वीं रैंक प्राप्त कर श्वेता ने बिहार प्रशासनिक सेवा में SDM (उप समाहर्ता) पद हासिल किया है।

श्वेता की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने यह उपलब्धि बेहद कठिन परिस्थितियों में हासिल की। वर्ष 2012 में पिता राम प्रताप प्रसाद के असामयिक निधन के बाद परिवार पर संकट का पहाड़ टूट पड़ा था, लेकिन उनकी मां माया कुमारी ने हार नहीं मानी और अपने बच्चों के सपनों को जिंदा रखा।

मां बनीं सबसे बड़ी ताकत

पिता का साया उठा, मां ने नहीं टूटने दिया हौसला; BPSC में 85वीं रैंक लाकर SDM बनीं श्वेता भारती

श्वेता की मां बिहारशरीफ अनुमंडल कृषि कार्यालय में निम्न वर्गीय लिपिक के पद पर कार्यरत हैं। पति के निधन के बाद उन्होंने अकेले ही तीनों बच्चों की परवरिश की और उन्हें बेहतर शिक्षा दिलाई।

श्वेता तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके बड़े भाई सुधांशु शेखर हैदराबाद में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जबकि बड़ी बहन सुप्रिया भारती IGIMS पटना के कार्डियक सर्जरी विभाग में कार्यरत हैं।

बचपन से था अफसर बनने का सपना

पिता का साया उठा, मां ने नहीं टूटने दिया हौसला; BPSC में 85वीं रैंक लाकर SDM बनीं श्वेता भारती

श्वेता ने बताया कि स्कूल के दिनों में अधिकारियों को देखकर उनके मन में सिविल सेवा में जाने का सपना पैदा हुआ। तभी उन्होंने तय कर लिया था कि एक दिन प्रशासनिक अधिकारी बनकर समाज की सेवा करेंगी।

उन्होंने कहा कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, अगर व्यक्ति खुद पर विश्वास बनाए रखे तो सफलता जरूर मिलती है।

पढ़ाई में हमेशा रहीं अव्वल

श्वेता का शैक्षणिक रिकॉर्ड शुरू से ही शानदार रहा है।

  • 2014 में 10वीं में 10 CGPA
  • 2016 में इंटरमीडिएट साइंस में 82% अंक
  • BHU से स्नातक में गोल्ड मेडल
  • नालंदा खुला विश्वविद्यालय से परास्नातक में भी गोल्ड मेडल

उन्होंने हर स्तर पर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

तीसरे प्रयास में BPSC फतह

श्वेता ने BPSC की तैयारी मुख्य रूप से सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन टेस्ट सीरीज के माध्यम से की। उन्होंने केवल UPSC के ऑप्शनल विषय की कोचिंग ली थी।

यह उनका BPSC में तीसरा प्रयास था। इससे पहले वे UPSC के छह प्रयास दे चुकी थीं और तीन बार इंटरव्यू तक पहुंची थीं।

दिलचस्प बात यह है कि उन्हें केंद्र सरकार से जिला युवा अधिकारी (DYO) पद का अवसर भी मिला था, लेकिन उन्होंने SDM बनने के अपने सपने को प्राथमिकता दी।

बिना कोचिंग के रचा इतिहास

पिता का साया उठा, मां ने नहीं टूटने दिया हौसला; BPSC में 85वीं रैंक लाकर SDM बनीं श्वेता भारती

आज जब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को महंगी कोचिंग से जोड़कर देखा जाता है, श्वेता ने साबित कर दिया कि सही रणनीति, अनुशासन और निरंतर मेहनत से बिना महंगी कोचिंग के भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां, भाई-बहन, परिवार और दोस्तों को दिया।

शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर रहेगा फोकस

SDM बनने के बाद अपनी प्राथमिकताओं पर बात करते हुए श्वेता ने कहा कि वे पूरी ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगी।

उन्होंने कहा,

“मेरी पहली प्राथमिकता अपनी सभी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाना होगी। इसके साथ ही शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दूंगी। मेरा मानना है कि बिहार के विकास से ही विकसित भारत का सपना साकार होगा और मैं इसमें अपना योगदान देने की पूरी कोशिश करूंगी।”

युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा

पिता के निधन, आर्थिक चुनौतियों और सीमित संसाधनों के बावजूद श्वेता भारती ने जो सफलता हासिल की है, वह बिहार के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि सपने बड़े हों और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।

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