सहरसा में ‘आवास’ के नाम पर लूट: हाटी पंचायत में दलालों का ‘PhonePe’ सिंडिकेट; कर्ज लेकर रिश्वत देने वाली बबिता आज भी झोपड़ी में रहने को मजबूर

नवहट्टा/सहरसा | 27 फरवरी, 2026: प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY), जिसका मकसद हर गरीब को छत देना है, सहरसा के नवहट्टा प्रखंड की हाटी पंचायत में ‘अवैध कमाई’ का जरिया बन गई है। यहाँ सरकारी मुलाजिमों और दलालों के गठजोड़ ने भ्रष्टाचार का ऐसा ‘डिजिटल नेटवर्क’ बिछाया है कि अब रिश्वत भी ‘PhonePe’ के जरिए वसूली जा रही है। ‘VOB’ की पड़ताल में एक ऐसी हकीकत सामने आई है जो प्रशासनिक दावों की धज्जियां उड़ाती है।

दर्दनाक दास्तां: छत के लिए लिया कर्ज, अब चुका रही हैं सूद

​हाटी पंचायत की बबिता देवी की कहानी भ्रष्टाचार के इस काले खेल का सबसे बड़ा सबूत है।

  • धमकी भरा सौदा: आरोप है कि आवास सहायक फैसल रहमानी और उनके दलालों ने बबिता को धमकी दी कि अगर ‘सुविधा शुल्क’ नहीं दिया, तो लिस्ट से नाम काट दिया जाएगा।
  • रिश्वत का बोझ: सिर पर पक्की छत की चाहत में बबिता देवी ने 2,000 रुपये कर्ज लेकर बतौर रिश्वत दिए।
  • अंजाम: पैसे दिए दो महीने बीत गए, लेकिन बबिता आज भी उसी फूस की झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं। न छत मिली और न ही कर्ज के बोझ से राहत।

‘PhonePe’ और दलाल: वसूली का हाईटेक मॉडल

​स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि आवास सहायक अकेले इस खेल को अंजाम नहीं दे रहे हैं।

  1. मिडिलमैन सिंडिकेट: आवास सहायक अक्सर कुछ खास दलालों के साथ ही पंचायत में नजर आते हैं।
  2. डिजिटल उगाही: रिश्वत के लिए अब नकद का इंतजार नहीं किया जाता; ‘PhonePe’ के जरिए धड़ल्ले से अवैध वसूली की जा रही है।
  3. अपात्रों की चांदी: जिनके पास पहले से ही आलीशान पक्के मकान हैं, उनके नाम ‘पैसे की ताकत’ पर लिस्ट में सबसे ऊपर हैं, जबकि असली हकदार दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।

प्रशासनिक चुप्पी: रडार पर आवास सहायक

​जब इस फर्जीवाड़े पर आवास सहायक फैसल रहमानी का पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कॉल काट दिया। यह चुप्पी खुद-ब-खुद कई सवालों के जवाब दे रही है। अब सवाल यह है कि क्या नवहट्टा की BDO प्रिया भारती और DDC कुमार गौरव इस ‘PhonePe वसूली सिंडिकेट’ पर नकेल कसेंगे?

VOB का नजरिया: क्या ‘गरीब का हक’ केवल कागजों तक सीमित है?

एक आवास सहायक की हिम्मत इतनी कैसे बढ़ गई कि वह सरेआम धमकी देकर रिश्वत वसूल रहा है? यह मामला केवल एक पंचायत का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था पर दाग है। जब तक छोटे स्तर के अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक बबिता देवी जैसी महिलाएं झोपड़ियों में ही दम तोड़ती रहेंगी। प्रशासन को न केवल आवास सहायक पर कार्रवाई करनी चाहिए, बल्कि उन ‘अपात्र अमीरों’ के नाम भी लिस्ट से हटाने चाहिए जिन्होंने रिश्वत देकर गरीबों का हक मारा है।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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