बिहार के 537 अंचलों में ‘तालाबंदी’! आज से CO-RO भी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर; कर्मचारी पहले से ही थे बाहर, अब पूरी तरह ‘सिस्टम डाउन’

बिहार में अगर आप आज जाति, आय या आवासीय प्रमाणपत्र बनवाने की सोच रहे हैं, या जमीन के दाखिल-खारिज (Mutation) का इंतजार कर रहे हैं, तो आपके लिए बुरी खबर है। राज्य की प्रशासनिक रीढ़ कहे जाने वाले राजस्व विभाग के अधिकारियों ने आज से सामूहिक ‘कलमबंद’ हड़ताल का एलान कर दिया है। 11 फरवरी से पहले ही राजस्व कर्मचारी आंदोलन पर थे, और अब अंचलाधिकारी (CO) और राजस्व अधिकारी (RO) के भी मैदान में उतरने से पूरा विभाग ‘कोमा’ में चला गया है।

दाखिल-खारिज से लेकर सर्वे तक… सब ‘ठप’

​बिहार राजस्व सेवा (BRS) के सभी 537 अंचलों में काम करने वाले अधिकारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस हड़ताल का सीधा असर आम जनता की जेब और जरूरी कामों पर पड़ने वाला है:

  • प्रमाणपत्रों पर ब्रेक: जाति, आय और आवासीय प्रमाणपत्रों के हजारों आवेदन अब फाइलों में दबे रह जाएंगे। छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह बड़ा झटका है।
  • जमीन का खेल रुका: दाखिल-खारिज (Mutation) और भूमि परिमार्जन की प्रक्रिया पूरी तरह बंद हो गई है। जमीन की रजिस्ट्री के बाद होने वाला सारा सरकारी काम अब अटक गया है।
  • सर्वे और चकबंदी: राज्य सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट ‘भूमि सर्वे’ और चकबंदी का काम भी आज से बंद है, क्योंकि इसके नोडल अधिकारी ही हड़ताल पर हैं।
  • 2027 जनगणना पर संकट: देश में होने वाली प्रस्तावित जनगणना 2027 की शुरुआती तैयारियों के लिए राजस्व विभाग ही नोडल एजेंसी है। अधिकारियों की गैर-मौजूदगी में ये तैयारियां भी पटरी से उतर गई हैं।

‘बिरसा’ और ‘बिरसा यूनाइटेड’ हुए एक, सरकार की बढ़ीं मुश्किलें

​इस बार की हड़ताल इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि बिहार राजस्व सेवा के दोनों बड़े संगठन— बिरसा (BIRSA) और बिरसा यूनाइटेड—एक मंच पर आ गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सरकार सिर्फ आश्वासन की ‘घुट्टी’ पिलाती है, लेकिन उनकी लंबित मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया जाता।

​राजस्व कर्मचारी संघ पिछले करीब एक महीने (11 फरवरी) से सड़कों पर है। अब अधिकारियों के भी साथ आने से राजस्व विभाग का पूरा ‘ईकोसिस्टम’ ठप हो गया है। कृषि गणना निदेशालय की रिपोर्टिंग और डेटा संकलन का काम भी पूरी तरह रुक गया है।

VOB का नजरिया: जब ‘हाकिम’ और ‘बाबू’ दोनों ही छुट्टी पर हों!

​बिहार में जमीन से जुड़े विवाद पहले ही सिरदर्द बने हुए हैं, ऊपर से यह हड़ताल कोढ़ में खाज का काम करेगी। एक तरफ सरकार 2027 की जनगणना और भूमि सुधारों के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ विभाग के पहिए ही जाम हैं। अगर सरकार ने जल्द ही इन अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ टेबल पर बैठकर समाधान नहीं निकाला, तो आम जनता की परेशानी बढ़नी तय है। फिलहाल, ब्लॉक (अंचल) कार्यालयों में केवल सन्नाटा पसरा है और जनता ‘तारीख पर तारीख’ मिलने की आशंका से डरी हुई है।

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