पटना, 17 जुलाई 2025 | बिहार में मौसम की मार जारी है। बुधवार को राज्य के कई जिलों में वज्रपात (ठनका) गिरने से 14 लोगों की जान चली गई, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। वैशाली, नालंदा, पटना, गया, औरंगाबाद और शेखपुरा जिलों से जनहानि की खबरें सामने आई हैं।
वैशाली: क्रिकेट खेलते दो युवकों समेत 4 की मौत
वैशाली जिले के राघोपुर थाना क्षेत्र के चांदपुरा गांव में आकाशीय बिजली गिरने से क्रिकेट खेल रहे 18 वर्षीय विपिन कुमार और 20 वर्षीय विजय कुमार की मौके पर ही मौत हो गई।
साथ ही 6 अन्य युवक झुलस गए, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।
लालगंज थाना क्षेत्र के पीरापुर गांव में धान रोप रही 53 वर्षीय इंदु देवी की वज्रपात की चपेट में आने से मौत हो गई।
बिदुपुर थाना क्षेत्र के चकसिकन्दर ढाला के पास वज्रपात में एक युवक देव कुमार (पिता – प्रमोद पासवान) की मौत हो गई और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इस दौरान दो भैंसों की भी मौत हो गई।
नालंदा: वज्रपात से 5 की मौत, मासूम घायल
नालंदा जिले में कुल 5 लोगों की जान वज्रपात की चपेट में आकर चली गई:
- अशोधा देवी (40), दाऊदपुर, नूरसराय
- सीमा देवी (40), मखदुमपुर, नगरनौसा
- रणधीर प्रसाद (55), गिरधरचक, वेना
- रामविलास यादव (55), चंदुआरा, रहुई
- सागर कुमार (12), इंग्लिशपर, गिरियक
इसके अलावा तीन लोग, जिनमें दो मासूम शामिल हैं, गंभीर रूप से घायल हैं और इलाजरत हैं।
पटना, गया, औरंगाबाद और शेखपुरा में भी मौतें
- पटना जिले के खुसरूपुर में खेत में काम कर रहे दो लोगों की मौत वज्रपात से हुई।
- गया जिले में एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है।
- औरंगाबाद के कुटुंबा में एक शख्स की जान गई है।
- शेखपुरा जिले में भी एक व्यक्ति की वज्रपात से मौत हुई है।
सरकारी प्रतिक्रिया और राहत
सरकारी स्तर पर आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी प्रभावित जिलों को राहत सामग्री और सहायता राशि मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। मृतकों के परिजनों को आपदा राहत फंड से 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में भी बिहार के कई हिस्सों में गर्जन, वज्रपात और भारी वर्षा की संभावना बनी हुई है। लोगों से अपील की गई है कि बारिश और गरज-चमक के दौरान खुले स्थानों, खेतों या पेड़ों के नीचे खड़े न हों।
बिहार में मौसम का रौद्र रूप जारी है और लगातार हो रही मौतों ने प्रशासन को अलर्ट मोड में ला दिया है। ग्रामीण इलाकों में जागरूकता और सुरक्षा उपायों की कमी अब जानलेवा साबित हो रही है। जरूरत है कि मौसम अलर्ट को गंभीरता से लिया जाए और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने के लिए प्रेरित किया जाए।

