HIGHLIGHTS: चकाई में कुदरत का कहर; हंसी-खुशी परीक्षा देकर लौट रही लाडली का ‘मातम’ में बदला सफर
- हृदयविदारक घटना: चकाई के पेटर पहाड़ी पंचायत अंतर्गत जलखरिया गांव में वज्रपात (ठनका) की चपेट में आने से 15 वर्षीय रागिनी कुमारी की मौके पर ही मौत।
- इम्तिहान का आखिरी दिन: नौवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षा देकर अपनी सहेलियों के साथ साइकिल से घर लौट रही थी छात्रा।
- मां की पुकार बनी वजह: सहेलियों ने रुकना चाहा, पर रागिनी ने कहा— “मम्मी फोन कर रही हैं, घर जल्दी जाना है”; और वही पल आखिरी साबित हुआ।
- शिक्षक पिता पर टूटा पहाड़: मृतका के पिता रंजीत दास खुद उसी स्कूल में शिक्षक हैं, जहां से बेटी परीक्षा देकर निकली थी।
जमुई/चकाई | 21 मार्च, 2026
बिहार में शुक्रवार का दिन आसमानी बिजली (वज्रपात) के लिहाज से ‘ब्लैक फ्राइडे’ साबित हुआ है। जमुई के चकाई प्रखंड में एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे इलाके के कलेजे को चीर कर रख दिया है। एक तरफ जहां पिता स्कूल में बच्चों का भविष्य संवार रहे थे, वहीं दूसरी तरफ उसी स्कूल से लौट रही उनकी अपनी ही बेटी कुदरत के बेरहम प्रहार का शिकार हो गई। अजय नदी के किनारे हुआ वह धमाका इतना जोरदार था कि रागिनी को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
“मम्मी का फोन आ रहा है…” — वो आखिरी चंद शब्द
सहेलियों राखी और सुलेखा के साथ रागिनी साइकिल से घर वापस आ रही थी।
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- अजय नदी का किनारा: जैसे ही वे जलखरिया पहुँचीं, आसमान काला हो गया। सहेलियों ने बारिश देख कहीं रुकने की सलाह दी।
- जल्दी की जिद: सहेली सुलेखा ने रुआंसे गले से बताया— “हम लोग रुकना चाहते थे, लेकिन रागिनी ने कहा कि मम्मी फोन कर रही हैं, जल्दी घर जाना है।”
- भीषण प्रहार: रागिनी बीच में थी, तभी एक जोरदार गर्जना हुई और बिजली सीधे उस पर गिरी। रागिनी दोबारा नहीं उठ सकी।
”हम लोग साथ आ रहे थे। अचानक जोर की आवाज हुई और हम सब गिर गए। मैं उठी और रागिनी को आवाज दी, पर उसने कोई जवाब नहीं दिया।”
— राखी कुमारी (रागिनी की सहेली)
परिवार में कोहराम: बेसुध हुए पिता, सदमे में दादा-दादी
शिक्षक रंजीत दास के लिए यह क्षति असहनीय है। अपनी होनहार बेटी को बेजान देख वे बार-बार बेसुध हो रहे हैं। मां इंदु कुमारी और बहन वर्षा का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग सदमे में हैं कि कैसे एक मां का अपनी बेटी को जल्दी घर बुलाने का प्यार भरा फोन, अनजाने में उसे मौत के करीब ले गया।
VOB का नजरिया: क्या ‘ठनका’ से बचाव की ट्रेनिंग स्कूलों में जरूरी नहीं?
बिहार में वज्रपात एक ‘साइलेंट किलर’ बनता जा रहा है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि रागिनी की मौत केवल एक हादसा नहीं, बल्कि जागरूकता की कमी का नतीजा भी है।
अक्सर ग्रामीण इलाकों में बारिश शुरू होते ही लोग सुरक्षित ठिकानों (पक्के मकानों) की तलाश करने के बजाय खुले मैदानों या नदियों के किनारे से जल्दी घर पहुँचने की कोशिश करते हैं, जो सबसे ज्यादा खतरनाक है। आपदा प्रबंधन विभाग को चाहिए कि स्कूलों में बच्चों को ‘ठनका’ के दौरान ‘सावधानी’ (जैसे- खुले में न रहना, साइकिल न चलाना) की विशेष ट्रेनिंग दी जाए। रागिनी के पिता खुद एक शिक्षक हैं, उनका दर्द पूरे शिक्षा जगत का दर्द है।


