जंग के साये में बुझी बिहार के लाल की जिंदगी: मर्चेंट नेवी कैप्टन राकेश रंजन सिंह का निधन, परिवार में मातम

नालंदा/रांची, 21 मार्च 2026: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने एक भारतीय परिवार की खुशियां छीन लीं। होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे मालवाहक जहाज पर तैनात मर्चेंट नेवी के कैप्टन राकेश रंजन सिंह (47) की मौत की खबर से बिहार और झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई है।

बताया जा रहा है कि उनका जहाज कई दिनों से युद्ध जैसे हालातों के बीच समुद्र में फंसा हुआ था।

नालंदा से रांची तक पसरा मातम

कैप्टन राकेश रंजन सिंह मूल रूप से बिहार के बिहारशरीफ (नालंदा) के निवासी थे, जबकि उनका परिवार झारखंड की राजधानी रांची में रहता है।

परिवार में उनकी पत्नी रंजू कुमारी और दो बेटे हैं:

  • बड़ा बेटा प्रवर, जो बेंगलुरु में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है
  • छोटा बेटा ओम, जो अभी स्कूल में है

उनके निधन की खबर मिलते ही परिवार और आसपास के इलाके में शोक का माहौल है।

24 साल का लंबा करियर, सबको छोड़ गए पीछे

राकेश रंजन सिंह पिछले 24 वर्षों से मर्चेंट नेवी में सेवाएं दे रहे थे। वे अपने मिलनसार स्वभाव और व्यवहार के कारण समाज में काफी लोकप्रिय थे।

स्थानीय लोग उन्हें प्यार से ‘देवानंद’ के नाम से भी जानते थे।

आखिरी बातचीत बनी याद

परिजनों के मुताबिक, 18 मार्च को राकेश की आखिरी बार परिवार से बात हुई थी।

उन्होंने उस दौरान बताया था कि:

  • समुद्र में कई जहाज रुके हुए हैं
  • हालात बेहद नाजुक हैं
  • आगे की स्थिति पूरी तरह अनिश्चित है

किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी बातचीत साबित होगी।

भाई का दर्द: “एक दिन बाद युद्ध होता तो बच जाते”

राकेश के बड़े भाई उमेश कुमार ने भावुक होकर कहा कि अगर हालात एक दिन बाद बिगड़ते, तो उनका भाई सुरक्षित निकल सकता था।

उन्होंने कहा कि किस्मत ने परिवार से एक जिम्मेदार बेटा और पिता छीन लिया।

अंतिम संस्कार की तैयारी

कैप्टन राकेश रंजन सिंह के पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया जारी है।

  • अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव गोवा चक (सरमेरा, नालंदा) में किया जाएगा
  • अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर गांव ले जाया जाएगा

शोक में डूबा परिवार, कार्यक्रम रद्द

इस दुखद घटना के बाद रांची स्थित उनके आवासीय परिसर में होने वाले सभी सामाजिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं।

संयोग से उनकी बहन, जो दुबई में रहती हैं, इन दिनों भारत में ही हैं, जिससे उन्हें अंतिम दर्शन का अवसर मिल सकेगा।

एक बहुमुखी व्यक्तित्व का अंत

राकेश रंजन सिंह सिर्फ एक कुशल कैप्टन ही नहीं, बल्कि अपने युवावस्था में एक अच्छे क्रिकेटर और सामाजिक रूप से सक्रिय व्यक्ति भी थे।

उनके निधन की खबर सुनकर रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों का घर पर तांता लगा हुआ है।

निष्कर्ष

यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि वैश्विक संघर्षों का असर आम लोगों के जीवन पर कितना गहरा पड़ता है।

कैप्टन राकेश रंजन सिंह की असमय मृत्यु ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है, और हर कोई यही कह रहा है—अगर हालात थोड़े अलग होते, तो शायद एक जिंदगी बच सकती थी।

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