भागलपुर में ‘इश्क’ पर छिड़ा ‘कानूनी’ संग्राम! “लड़के को पीटा और उल्टा केस भी कर दिया”; SP दफ्तर घेरकर महिलाओं ने मांगा इंसाफ

HIGHLIGHTS

  • बवाल: बबरगंज थाना क्षेत्र के प्रेम प्रसंग मामले ने पकड़ा तूल; एसपी कार्यालय पहुंचीं महिलाएं।
  • गंभीर आरोप: “लड़की वालों ने पहले लड़के की जमकर धुलाई की, फिर थाने जाकर केस दर्ज कराया।”
  • एकतरफा कार्रवाई: महिलाओं का दावा— “लड़की की गलती ज्यादा, फिर लड़के पर ही गाज क्यों?”
  • न्याय की गुहार: निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर पुलिस कप्तान के द्वार पर प्रदर्शन।

भागलपुर | 15 मार्च, 2026

​भागलपुर के बबरगंज थाना क्षेत्र में एक प्रेम प्रसंग का मामला अब थाने की चौखट लांघकर एसपी (SP) कार्यालय तक पहुँच गया है। शनिवार को बड़ी संख्या में महिलाएं पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुँचीं और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि प्रेम प्रसंग के इस मामले में पुलिस ने ‘एकतरफा’ रुख अपनाते हुए केवल लड़के के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जबकि असली कहानी कुछ और ही है।

“लड़के को पीटा, फिर कर दी FIR”: नया मोड़

​प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने आरोप लगाया कि लड़की के परिजनों ने पहले लड़के को पकड़कर बेरहमी से पीटा और जब उनका मन नहीं भरा, तो अपनी रसूख का इस्तेमाल कर लड़के के खिलाफ केस दर्ज करा दिया। महिलाओं का कहना है कि यह सरासर अन्याय है। उन्होंने सवाल उठाया कि “जब प्यार दोनों तरफ से था और लड़की की भागीदारी भी बराबर की थी, तो फिर सजा केवल लड़के को ही क्यों दी जा रही है?”

“लड़की की गलती ज्यादा”: महिलाओं का तीखा तेवर

​एसपी कार्यालय के बाहर खड़ी महिलाओं ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण में लड़की की भूमिका अधिक सक्रिय थी। उनका दावा है कि लड़की ने ही लड़के को आगे बढ़ाया, लेकिन जब मामला खुला तो लड़की पक्ष ने उसे ‘पीड़िता’ बनाकर पेश कर दिया और लड़के को ‘अपराधी’ बना दिया। महिलाओं की मांग है कि पुलिस मामले की गहराई से जांच करे और एकतरफा कार्रवाई पर रोक लगाए।

VOB का नजरिया: ‘कानून’ और ‘इश्क’ के बीच फंसी पुलिस?

​प्रेम प्रसंग के मामलों में अक्सर ‘जरा सी चूक’ पूरे मामले को अपराध की ओर मोड़ देती है। भागलपुर का यह मामला ‘ऑन-रिफ्लेक्शन’ है उस सामाजिक मानसिकता का, जहाँ अक्सर पुरुष पक्ष को ही दोषी मान लिया जाता है। अगर यह सच है कि लड़के को पीटने के बाद उस पर केस किया गया, तो यह कानून का दुरुपयोग है। हालांकि, पुलिस को यह भी देखना होगा कि क्या इसमें कोई नाबालिग का मामला तो नहीं या कहीं कोई जबरदस्ती तो नहीं हुई। लेकिन ‘भीड़’ बनकर महिलाओं का एसपी दफ्तर पहुँचना यह बताता है कि समाज में अब ‘एकतरफा जांच’ के खिलाफ आवाजें उठने लगी हैं। जांच निष्पक्ष होनी चाहिए—प्यार में न तो लड़का अपराधी होना चाहिए और न लड़की का बेजा इस्तेमाल।

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