भोजपुर में ‘सेक्स्टॉर्शन’ का बड़ा खुलासा; फेसबुक पर ‘नेहा’ बनकर वकील से ठगे 19 लाख, मास्टरमाइंड आदिल राशिद गिरफ्तार

समाचार के मुख्य बिंदु: डिजिटल हनीट्रैप में फंसा प्रतिष्ठित अधिवक्ता

  • बड़ी कामयाबी: भोजपुर पुलिस ने ‘सेक्स्टॉर्शन’ (Sextortion) के जरिए लाखों की उगाही करने वाले अंतर-जिला गिरोह के मास्टरमाइंड को दबोचा।
  • आरोपी की पहचान: आदिल राशिद, निवासी- दौलतपुर, आरा (भोजपुर)।
  • फर्जी प्रोफाइल का मायाजाल: आरोपी ‘नेहा कुमारी’ नाम से फर्जी फेसबुक आईडी चलाता था, जिसमें नाबालिग लड़कियों की चोरी की गई तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया था।
  • ठगी का शिकार: शहर के प्रतिष्ठित अधिवक्ता प्रमोद कुमार से दोस्ती कर आपत्तिजनक वीडियो बनाया और सामाजिक प्रतिष्ठा की धमकी देकर 19.35 लाख रुपये वसूले।
  • डिजिटल बरामदगी: पुलिस ने आरोपी के पास से 4 मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनमें ब्लैकमेलिंग के चैट और बैंक ट्रांजैक्शन के पुख्ता सबूत मिले हैं।
  • VOB इनसाइट: यह मामला दर्शाता है कि साइबर अपराधी अब कानूनी जानकारों को भी अपना निशाना बना रहे हैं; सामाजिक लोक-लाज का डर ही अपराधियों की सबसे बड़ी ताकत बन रहा है।

आरा (भोजपुर) | 28 मार्च, 2026

​भोजपुर जिले में डिजिटल ठगी और ब्लैकमेलिंग के एक ऐसे सनसनीखेज मामले का पर्दाफाश हुआ है, जिसने पुलिस और आम जनता दोनों को हैरान कर दिया है। एक शातिर अपराधी ने फेसबुक पर ‘हनीट्रैप’ का जाल बिछाकर एक वकील से करीब 20 लाख रुपये की उगाही कर ली। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, भोजपुर पुलिस ने तकनीकी अनुसंधान के जरिए इस गिरोह के मास्टरमाइंड आदिल राशिद को गिरफ्तार कर लिया है, जो मासूम लड़कियों की फोटो का सहारा लेकर लोगों को ब्लैकमेल करता था।

फेसबुक पर ‘नेहा’ से दोस्ती और फिर ‘खौफ’ का खेल

​पुलिस जांच में जो कहानी सामने आई है, वह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। गिरफ्तार आरोपी आदिल राशिद ने फेसबुक पर ‘नेहा कुमारी’ नाम से एक फर्जी प्रोफाइल बनाई थी। इस प्रोफाइल को विश्वसनीय बनाने के लिए उसने इंटरनेट से नाबालिग लड़कियों की सुंदर तस्वीरें चोरी कर पोस्ट की थीं।

वारदात का क्रमवार ब्योरा:

  1. संपर्क और दोस्ती: आरोपी ने इसी फर्जी आईडी से अधिवक्ता प्रमोद कुमार को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी। धीरे-धीरे बातचीत शुरू हुई और आरोपी ने उन्हें अपने भरोसे में ले लिया।
  2. वीडियो कॉल का जाल: बातचीत जब गहरी हुई, तो आरोपी ने वीडियो कॉल की पेशकश की। इसी कॉल के दौरान शातिर अपराधी ने कुछ आपत्तिजनक सामग्री (Nude/Obscene recording) रिकॉर्ड कर ली।
  3. ब्लैकमेलिंग की शुरुआत: रिकॉर्डिंग होते ही ‘नेहा’ का मुखौटा उतर गया और आदिल राशिद असली रूप में आ गया। उसने वीडियो को सोशल मीडिया और पीड़ित के रिश्तेदारों को भेजने की धमकी देनी शुरू कर दी।

19.35 लाख रुपये की वसूली: किश्तों में लूटी गई जीवन भर की कमाई

​अधिवक्ता प्रमोद कुमार अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा को लेकर डरे हुए थे। इसी डर का फायदा उठाकर आदिल ने पैसों की मांग शुरू की।

  • भय का माहौल: पीड़ित ने पुलिस को बताया कि आरोपी लगातार उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था।
  • लेनदेन का विवरण: बदनामी से बचने के लिए अधिवक्ता ने अलग-अलग समय पर कुल 19 लाख 35 हजार रुपये आरोपी द्वारा बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर किए।
  • हिम्मत और एफआईआर: इतनी बड़ी रकम देने के बाद भी जब आरोपी की भूख शांत नहीं हुई और उसने और पैसों की मांग की, तब पीड़ित ने हिम्मत जुटाई और भोजपुर पुलिस से संपर्क किया।

पुलिस की ‘डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक’: ऐसे दबोचा गया मास्टरमाइंड

​भोजपुर एसपी के निर्देश पर एक विशेष साइबर टीम का गठन किया गया। पुलिस ने सबसे पहले उन बैंक खातों का विवरण खंगाला जिनमें पैसे भेजे गए थे।

  1. टेक्निकल ट्रैकिंग: पुलिस ने ‘नेहा कुमारी’ नाम की प्रोफाइल के आईपी एड्रेस (IP Address) और आदिल राशिद के मोबाइल लोकेशन को ट्रैक किया।
  2. छापेमारी: डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर पुलिस आरा के दौलतपुर पहुंची और आदिल राशिद को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया।
  3. बरामदगी: आरोपी के पास से 4 स्मार्टफोन बरामद हुए हैं। प्राथमिक जांच में इन फोन्स के भीतर कई अन्य लोगों के आपत्तिजनक वीडियो और ब्लैकमेलिंग से जुड़े चैट मिले हैं।

VOB का नजरिया: डिजिटल सुरक्षा पर विशेषज्ञों की राय

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) इस मामले को जनता के लिए एक बड़ी चेतावनी मानता है।

  • अनजान लोगों से दूरी: सोशल मीडिया पर किसी भी आकर्षक प्रोफाइल या अनजान व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने से बचें, भले ही प्रोफाइल फोटो कितनी भी विश्वसनीय क्यों न लगे।
  • वीडियो कॉल पर सावधानी: अनजान लोगों के साथ वीडियो कॉल करना खतरनाक हो सकता है। साइबर अपराधी स्क्रीन रिकॉर्डिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग कर आपके निजी पलों को हथियार बना सकते हैं।
  • तुरंत रिपोर्ट करें: यदि आप ब्लैकमेलिंग का शिकार होते हैं, तो पैसे देने के बजाय तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या ‘1930’ साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें। अपराधी आपके डर का ही फायदा उठाते हैं।

सुशासन और साइबर सुरक्षा का संकल्प

​भोजपुर पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने एक बड़े गिरोह के नेटवर्क को हिला दिया है। पुलिस अब उन बैंक खातों के ‘मनी ट्रेल’ की जांच कर रही है ताकि पता चल सके कि ठगी की यह रकम कहां-कहां भेजी गई। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी और न्यायालय में होने वाली अगली सुनवाई की हर अपडेट आप तक सबसे पहले पहुँचाता रहेगा।

  • ये भी पढ़े..

    भरत तिवारी एनकाउंटर केस: जांच आयोग के सामने फूट पड़ा मां का दर्द, STF को देखकर बोलीं- “मेरे बेटे के हत्यारों को फांसी हो”

    Share Add as a preferred…

    बिहार में AI क्रांति की तैयारी! गूगल, माइक्रोसॉफ्ट समेत 4 बड़ी कंपनियों के साथ होगा समझौता, कैबिनेट से मिली मंजूरी

    Share Add as a preferred…