बिहार विधानसभा में ठहाके: भाजपा विधायक ने स्पीकर को बता दिया ‘अंगरक्षक’; बोले- 4 करोड़ फंड है पर बच्चों को बैट-बॉल भी नहीं दे सकते

  • फंड पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायक प्रमोद कुमार की जुबान फिसली; “हुजूर आप हमारे अंगरक्षक हैं” सुनते ही गूंज उठा सदन
  • स्पीकर ने हंसते हुए सुधारा- “अंगरक्षक नहीं, संरक्षक बोलिए”; विधायक ने मांगी माफी
  • सरकार को घेरा: “4 करोड़ की राशि लेकर ‘टुकुर-टुकुर’ देखते रह जाते हैं, नियम ऐसे हैं कि स्कूल में लाइब्रेरी तक नहीं बनवा सकते”

द वॉयस ऑफ बिहार (पटना)

​बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने गंभीर माहौल को ठहाकों में बदल दिया। अपनी मांगों को लेकर सरकार को घेर रहे भाजपा विधायक प्रमोद कुमार (Pramod Kumar) की जुबान ऐसी फिसली कि उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को ‘संरक्षक’ की जगह ‘अंगरक्षक’ (Bodyguard) बता दिया। यह सुनते ही पूरा सदन हंसी से गूंज उठा। हालांकि, हंसी-मजाक के बीच विधायक ने ‘विधायक ऐच्छिक कोष’ (MLA Fund) के नियमों को लेकर एक बड़ी पीड़ा भी जाहिर की।

“हुजूर… आप हमारे अंगरक्षक हैं”

​सदन में विधायक प्रमोद कुमार अपनी बात रख रहे थे। इसी दौरान फ्लो-फ्लो में उनके मुंह से निकल गया- “हुजूर… आप (स्पीकर) हमारे अंगरक्षक हैं।”

  • ​यह सुनते ही पक्ष और विपक्ष, दोनों तरफ के सदस्य जोर-जोर से हंसने लगे।
  • ​स्पीकर ने भी मुस्कुराते हुए विधायक को टोकते हुए कहा- “अंगरक्षक नहीं, संरक्षक (Protector) कहिए।”
  • ​अपनी गलती का अहसास होते ही विधायक ने तुरंत सुधार किया और कहा- “हां हुजूर.. बोलने में गलती हो गई, आप हमारे संरक्षक हैं।”

“4 करोड़ फंड है, पर हम लाचार हैं”

​हंसी-मजाक से इतर, प्रमोद कुमार ने ‘मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना’ (विधायक ऐच्छिक कोष) के उपयोग पर लगी पाबंदियों को लेकर सरकार से तीखे सवाल पूछे।

  • टुकुर-टुकुर देखते हैं: उन्होंने कहा, “विधायक के पास 4 करोड़ रुपये का फंड होता है, लेकिन हम लाचार होकर सिर्फ टुकुर-टुकुर देखते रह जाते हैं।”
  • बैट-बॉल भी नहीं दे सकते: विधायक ने दर्द बयां करते हुए कहा कि हम किसी क्रिकेट मैच का उद्घाटन करने जाते हैं, लेकिन फंड के नियमों के कारण खिलाड़ियों को एक बैट-बॉल तक नहीं दे सकते। स्कूलों में जाते हैं, लेकिन वहां अपनी मर्जी से एक पुस्तकालय (Library) नहीं बनवा सकते।
  • दूसरे राज्यों का हवाला: उन्होंने दावा किया कि एनडीए शासित कई राज्यों में विधायकों को अपने फंड से सामाजिक कार्य और विकास योजनाएं चलाने की छूट है, लेकिन बिहार में जटिल नियमों ने हाथ बांध रखे हैं।

मंत्री विजेंद्र यादव का तंज- ‘मंत्री रहते हैं तो चुप रहते हैं’

​मामला योजना एवं विकास विभाग से जुड़ा था, इसलिए विभागीय मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने जवाब दिया। उन्होंने विधायक की मांग पर तंज कसते हुए कहा:

  • “ये जब मंत्री रहते हैं तो चुप रहते हैं, और जब मंत्री नहीं रहते तो इधर-उधर का सवाल उठाते रहते हैं।”
  • सरकार का रुख: मंत्री ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है। हालांकि, उन्होंने कहा कि यदि विधायक दूसरे राज्यों की नीति का प्रमाण (Proof) लाकर दें, तो सरकार उस पर विचार कर सकती है।
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