
पटना। राजधानी पटना में मंगलवार को जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर और उनके समर्थकों पर उस वक्त लाठीचार्ज किया गया, जब वे बिहार विधानसभा का घेराव करने के लिए बढ़ रहे थे। प्रशांत किशोर अपने समर्थकों के साथ सरकार को ज्ञापन सौंपने जा रहे थे, जिसमें दो साल पहले किए गए वादों को पूरा न करने पर सवाल उठाए गए थे। पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में एक समर्थक के घायल होने की सूचना है।
बैरिकेडिंग तोड़ने पर भड़की पुलिस
घटना सरदार पटेल गोलंबर के पास हुई, जहां विधानसभा की सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने पहले से ही बैरिकेडिंग की थी। प्रशांत किशोर के नेतृत्व में जन सुराज समर्थक बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने लगे, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया।
प्रशांत किशोर का आरोप: दो-दो लाख का वादा, एक रुपये तक नहीं मिला
प्रशांत किशोर ने लाठीचार्ज के बाद मीडिया से कहा,
“हम शांतिपूर्वक जाकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन देना चाहते थे। दो साल पहले सरकार ने दावा किया था कि 94 लाख भूमिहीन परिवारों को दो-दो लाख रुपये दिए जाएंगे, लेकिन आज तक किसी को एक रुपया तक नहीं मिला।”
उन्होंने यह भी बताया कि जन सुराज की ओर से तैयार ज्ञापन पर एक करोड़ लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिसे वे मुख्यमंत्री को सौंपना चाहते थे।
“जब तक कोई प्रतिनिधि ज्ञापन लेने नहीं आता, हम यहीं बैठे रहेंगे। अभी तो संघर्ष की शुरुआत है, तीन महीने में इनका जीना हराम कर देंगे।”
लाठीचार्ज पर तीखी प्रतिक्रिया
प्रशांत किशोर ने चेतावनी देते हुए कहा,
“जवाब ऐसा देंगे कि पूरा बिहार देखेगा। हम एक लाख लोगों को लेकर दोबारा आएंगे। सरकार को उनके घर में घेरेंगे।”
मनीष कश्यप ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
जन सुराज में हाल ही में शामिल हुए यूट्यूबर मनीष कश्यप ने कहा,
“सरकार ने वादा किया था कि हर युवा को दो-दो लाख रुपये रोजगार के लिए मिलेंगे, लेकिन किसी को कुछ नहीं मिला। भूमिहीन परिवारों को तीन डिसमिल जमीन देने का वादा भी अधूरा है। अंचल स्तर पर हो रहे जमीन सर्वे में भारी धांधली हो रही है।”
उन्होंने कहा कि,
“बिहार में कोई विकास नहीं हुआ है। एयरपोर्ट छोटा है, सड़क निर्माण में घोटाले हो रहे हैं। तीन-चार महीने में सरकार बदल देंगे।”
विधानसभा सत्र के चलते नहीं मिल सके मुख्यमंत्री
घटना के समय बिहार विधानसभा का मानसून सत्र चल रहा था, इसलिए मुख्यमंत्री से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। प्रशासन ने सरदार पटेल गोलंबर पर ही जन सुराज समर्थकों को रोक दिया।
संपादकीय टिप्पणी:
जन आंदोलनों को लोकतंत्र में उचित स्थान और मंच मिलना चाहिए। लेकिन शांतिपूर्ण ढंग से किए गए विरोध प्रदर्शनों पर लाठीचार्ज जैसे कदम कई बार प्रशासन और जनता के बीच टकराव को और गहरा कर देते हैं।


