देर रात मोबाइल-टीवी की आदत बन रही बीमारियों की वजह, JLNMCH स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

भागलपुर: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में देर रात तक मोबाइल और टीवी का इस्तेमाल लोगों की आम आदत बनती जा रही है, खासकर युवाओं और बच्चों में। लेकिन अब यही आदत गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बनती दिख रही है। जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (JLNMCH) में हुई एक हालिया स्टडी ने इस खतरे को उजागर किया है।

अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में नींद से जुड़ी समस्याओं और सांस की बीमारियों के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। अब यह समस्या सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवा, किशोर और छोटे बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।

अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन्हें स्लीप डिसऑर्डर के साथ-साथ अस्थमा और एलर्जी जैसी समस्याएं भी हैं।

स्टडी में सामने आए आंकड़े

इस अध्ययन में जनवरी से जून 2026 के बीच कुल 6753 मरीजों की जांच की गई। इनमें से करीब 63 प्रतिशत मरीज ऐसे पाए गए, जिन्हें नींद की समस्या के साथ-साथ अस्थमा और एलर्जी दोनों की शिकायत थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि अनियमित नींद अब सिर्फ एक सामान्य समस्या नहीं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है।

कैसे बिगड़ती है सेहत

चिकित्सकों के अनुसार, पर्याप्त नींद न लेने से शरीर में सूजन बढ़ाने वाले तत्व सक्रिय हो जाते हैं, जो धीरे-धीरे फेफड़ों को प्रभावित करते हैं। इससे सांस से जुड़ी बीमारियां बढ़ने लगती हैं।

देर रात तक मोबाइल और टीवी देखने से नींद का प्राकृतिक चक्र बिगड़ जाता है, जिससे शरीर की जैविक घड़ी (बॉडी क्लॉक) प्रभावित होती है और नींद की गुणवत्ता खराब हो जाती है।

बच्चों और युवाओं पर ज्यादा असर

डॉक्टरों का मानना है कि इस समस्या का सबसे ज्यादा असर बच्चों और युवाओं पर पड़ रहा है। कम उम्र में ही गलत दिनचर्या और स्क्रीन की लत उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रही है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले वर्षों में अस्थमा और एलर्जी के मामलों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

विशेषज्ञों की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग अपनी दिनचर्या को संतुलित करें और समय पर सोने की आदत डालें। सोने से पहले मोबाइल और टीवी का उपयोग कम करना जरूरी है।

यह स्टडी एक स्पष्ट चेतावनी देती है कि आधुनिक जीवनशैली की लापरवाही भविष्य में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। समय रहते सतर्कता और सही आदतें अपनाना बेहद जरूरी है।

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