भागलपुर में भूमिहीनों का हल्लाबोल: ‘पहले बसाओ, फिर हटाओ’ की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन; रेलवे की जमीन खाली करने का विरोध

द वॉयस ऑफ बिहार | भागलपुर

​भागलपुर में आशियाना उजड़ने के डर से सैकड़ों भूमिहीन परिवार सड़क पर उतर आए हैं। मंगलवार को ‘झुग्गी झोपड़ी संघर्ष समिति’ के बैनर तले भीखनपुर क्षेत्र के रहने वाले सैकड़ों लोगों ने समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) गेट के समीप जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

इस्लामनगर के सैकड़ों परिवारों पर बेघर होने का खतरा

​प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पिछले कई दशकों से भीखनपुर स्थित गुमटी नंबर एक, दो और तीन के इस्लामनगर क्षेत्र में रह रहे हैं। यह जमीन भारतीय रेलवे के अधिकार क्षेत्र में आती है। रेलवे की ओर से अब इस जमीन को खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया है, जिससे सैकड़ों परिवारों की रातों की नींद उड़ गई है। लोगों का कहना है कि उनके पास न तो कोई अपनी जमीन है और न ही कहीं और जाने का ठिकाना।

प्रशासन के पुराने वादों पर उठे सवाल

​प्रदर्शन कर रहे भूमिहीन परिवारों ने जिला प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। उनकी मुख्य शिकायतें निम्नलिखित हैं:

  • आश्वासन का अभाव: प्रदर्शनकारियों का दावा है कि प्रशासन ने पहले उन्हें वैकल्पिक स्थान पर बसाने का भरोसा दिया था, जो अब तक अधूरा है।
  • बच्चों का भविष्य: लोगों का कहना है कि उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं, ऐसे में बिना किसी व्यवस्था के उजाड़े जाने से उनका भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
  • अल्टीमेटम का विरोध: रेलवे द्वारा अचानक जमीन खाली करने के आदेश से गरीब परिवारों में दहशत का माहौल है।

DM को सौंपा ज्ञापन, दी आंदोलन की चेतावनी

​प्रदर्शन के अंत में संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी (DM) को एक मांग पत्र सौंपा। उनकी स्पष्ट मांग है कि:

  1. ​रेलवे की जमीन खाली कराने से पहले सभी प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना या किसी अन्य सरकारी योजना के तहत बसाया जाए।
  2. ​जब तक रहने की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होती, तब तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई रोकी जाए।

चेतावनी: प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि यदि जिला प्रशासन उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं करता है और उन्हें बेघर करने की कोशिश की जाती है, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

“हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर गरीबों को बेघर करना न्यायसंगत नहीं है। हमें बस सर छुपाने के लिए छत चाहिए।”प्रदर्शन में शामिल एक बुजुर्ग महिला

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