भागलपुर में जमीन की भूख ने ली रंजीत की जान: परबत्ता में दोहरी हत्या से सनसनी, खाकी पर उठे सवाल और खौफ के साए में भटकती बेवा

  • ​भागलपुर जिले के परबत्ता थाना अंतर्गत गरैया गांव में जमीन विवाद के चलते हुई रंजीत यादव की हत्या ने पूरे क्षेत्र में तनाव और दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
  • ​मृतक की पत्नी सोनी देवी ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए भागलपुर डीआईजी को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है और अपनी जान का खतरा बताया है।
  • ​आरोप है कि हत्या के आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और केस वापस न लेने पर रंजीत के बेटे को भी जान से मारने की धमकी दे रहे हैं, जिससे पीड़ित परिवार दर-दर भटकने को मजबूर है।
  • ​साल 2024 में भी इन्हीं आरोपियों ने रंजीत पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला किया था, लेकिन पुलिस की कथित ढिलाई के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद रहे और अंततः रंजीत की हत्या कर दी गई।
  • ​सोनी देवी ने नवगछिया एसपी सहित तमाम आला अधिकारियों को अपनी आपबीती सुनाई है, जिसमें उन्होंने पुलिस द्वारा घटनास्थल की जांच तक न करने का संगीन आरोप लगाया है।

भागलपुर (द वॉयस ऑफ बिहार)।

जमीन विवाद की रंजिश में सरेआम गोलियों की गड़गड़ाहट और एक परिवार की बर्बादी

बिहार के भागलपुर जिले में जमीन के एक टुकड़े के लिए इंसानी खून बहाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। परबत्ता थाना क्षेत्र के गरैया गांव में एक बार फिर लालच और रंजिश ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ कर रख दिया है। यह मामला केवल एक व्यक्ति की हत्या का नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था की नाकामी का भी प्रमाण है जो समय रहते अपराधियों पर लगाम नहीं कस पाई। गरैया निवासी रंजीत यादव की हत्या ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। जमीन के जिस विवाद को बातचीत या कानूनी तरीके से सुलझाया जा सकता था, उसे अपराधियों ने गोलियों की गूंज से सुलझाने की कोशिश की। इस खूनी खेल के बाद गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है, लेकिन मृतक की पत्नी सोनी देवी की आंखों में न केवल आंसू हैं, बल्कि उस पुलिस तंत्र के खिलाफ आक्रोश भी है जिसने उनकी शिकायतों को अनसुना कर दिया।

डीआईजी की चौखट पर न्याय की गुहार और पुलिसिया सुस्ती पर तीखे प्रहार

अपने पति को खोने के बाद सोनी देवी ने अब सीधे भागलपुर के पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) के पास पहुंचकर अपनी फरियाद सुनाई है। उन्होंने एक विस्तृत आवेदन देकर बताया कि कैसे उनके पति रंजीत यादव को 2 जनवरी 2026 को मौत के घाट उतार दिया गया। सोनी देवी का आरोप है कि परबत्ता थाना कांड संख्या 02/2026 के तहत नामजद आरोपी आज भी कानून की गिरफ्त से बाहर हैं। डीआईजी को लिखे पत्र में उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि पुलिस की कार्यप्रणाली अपराधियों को शह दे रही है। घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी जांच की सुस्त रफ्तार ने अपराधियों के मन से कानून का डर खत्म कर दिया है। पीड़ित महिला ने पत्र में अपनी और अपने बेटे की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई है और मांग की है कि अगर जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो इस परिवार का अस्तित्व ही मिट जाएगा।

पुरानी अदावत और 2024 के उस जानलेवा हमले की अनसुनी दास्तां

इस हत्याकांड की जड़ें काफी पुरानी हैं। सोनी देवी ने खुलासा किया कि साल 2024 में भी इन्हीं आरोपियों ने उनके पति पर कुल्हाड़ी से हमला कर उन्हें जान से मारने की कोशिश की थी। उस समय दर्ज कांड संख्या 176/2024 के तहत मामला तो बना, लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव में आरोपी जेल से बाहर रहे। उस वक्त रंजीत यादव चमत्कारिक रूप से बच गए थे, लेकिन अपराधियों के मंसूबे नहीं बदले। सोनी देवी का मानना है कि अगर 2024 के उस हमले के बाद पुलिस ने आरोपियों को सख्त सजा दिलाई होती, तो आज 2026 में उनके पति की हत्या नहीं होती। यह पुलिस की विफलता का एक बड़ा उदाहरण है जहां एक शिकायतकर्ता को सुरक्षा देने के बजाय उसे अपराधियों के रहमोकरम पर छोड़ दिया गया। साल 2024 की वह घटना आज भी सोनी देवी के जेहन में एक खौफनाक याद की तरह बसी हुई है, जो अब एक हकीकत में बदल चुकी है।

अभियुक्तों की खुलेआम चुनौती और केस को जेब में रखने का दंभ

अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे केवल हत्या करके शांत नहीं बैठे हैं, बल्कि अब वे कानून का मजाक उड़ाने पर उतारू हैं। सोनी देवी का आरोप है कि अभियुक्त खुलेआम यह कहते घूम रहे हैं कि “इस केस से हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा, पूरा केस हमारे कब्जे में है।” यह बयान न केवल पीड़ित परिवार को डराने वाला है, बल्कि सीधे तौर पर पुलिस प्रशासन की साख को चुनौती दे रहा है। आरोपियों ने पीड़ित महिला के घर जाकर 10 दिनों का अल्टीमेटम दिया है कि अगर केस वापस नहीं लिया गया, तो सोनी देवी और उनके मासूम बेटे का अंजाम भी रंजीत यादव जैसा ही होगा। इस तरह की धमकियों ने यह साबित कर दिया है कि इलाके में पुलिस का इकबाल खत्म हो चुका है और अपराधियों को किसी भी बड़ी कार्रवाई का डर नहीं है।

अपराधियों के डर से घर छोड़ने को मजबूर और ठिकाने बदलने की बेबसी

आज सोनी देवी अपने ही गांव और अपने ही घर में रहने से डर रही हैं। अपराधियों की लगातार मिल रही धमकियों के कारण वे अपने बेटे के साथ अज्ञात ठिकानों पर छिपकर रहने को मजबूर हैं। जिस घर में उन्होंने अपनी जिंदगी के सुखद सपने देखे थे, आज वहीं उन्हें अपनी मौत का साया नजर आता है। पुलिस सुरक्षा के दावों के बीच एक बेवा का इस तरह दर-दर भटकना प्रशासन के चेहरे पर एक जोरदार तमाचा है। सोनी देवी का कहना है कि वे हर पल इस डर में जीती हैं कि कहीं आरोपी उन्हें ढूंढ न लें। रंजीत के जाने के बाद वह अपने बेटे की एकमात्र संरक्षक हैं, और उसकी जान की सुरक्षा के लिए उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगा दी है, लेकिन पुलिस की उदासीनता उनकी उम्मीदों को तोड़ रही है।

नवगछिया एसपी और आला अधिकारियों तक पहुंची शिकायतों की फाइल

सोनी देवी ने अपनी लड़ाई को केवल डीआईजी तक सीमित नहीं रखा है। उन्होंने इस पूरे मामले की प्रतिलिपि नवगछिया के आरक्षी अधीक्षक (SP), सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) को भी भेजी है। इन आवेदनों में उन्होंने स्पष्ट किया है कि घटना के बाद उन्होंने कई बार स्थानीय पुलिस और बड़े अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। उनका सबसे गंभीर आरोप यह है कि अब तक पुलिस की किसी टीम ने घटनास्थल पर जाकर उचित तरीके से साक्ष्य जुटाने या जांच करने की जहमत नहीं उठाई है। यह लापरवाही न केवल केस को कमजोर कर रही है, बल्कि आरोपियों को साक्ष्य मिटाने का भरपूर समय भी दे रही है। पुलिस महकमे के भीतर इस तरह की शिथिलता ने आम जनता के भरोसे को हिलाकर रख दिया है।

जमीन विवाद के खूनी खेल में प्रशासनिक सुस्ती का बड़ा खामियाजा

बिहार के ग्रामीण इलाकों में जमीन विवाद हमेशा से एक नासूर रहा है, लेकिन परबत्ता की यह घटना दिखाती है कि कैसे छोटे विवाद प्रशासनिक उपेक्षा के कारण बड़े हत्याकांड में बदल जाते हैं। गरैया गांव के लोग बताते हैं कि रंजीत और आरोपियों के बीच जमीन को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी। कई बार स्थानीय स्तर पर मामले को सुलझाने की कोशिश हुई, लेकिन रंजीत की जान लेने पर आमादा अपराधियों ने हर बार हिंसक रास्ता चुना। सोनी देवी का कहना है कि पुलिस को सब कुछ पता होने के बावजूद कोई निरोधात्मक कार्रवाई नहीं की गई। आज आलम यह है कि हत्यारा पक्ष अपनी ताकत और पहुंच के दम पर पीड़ित परिवार को कुचलने की कोशिश कर रहा है, जबकि रक्षक की भूमिका निभाने वाली पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी नजर आ रही है।

न्याय की आस में एक महिला का संघर्ष और कानून व्यवस्था पर तीखे सवाल

सोनी देवी का यह संघर्ष केवल रंजीत यादव के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए नहीं है, बल्कि यह अपनी और अपने बेटे की गरिमा के साथ जीने के हक की लड़ाई भी है। भागलपुर के परबत्ता में हुई यह ‘दोहरी हत्या’ (मानसिक और शारीरिक) एक ऐसे समाज की तस्वीर पेश करती है जहां कानून का राज नहीं, बल्कि लाठी और गोली की ताकत चलती है। डीआईजी भागलपुर से सोनी देवी ने जो मांगें की हैं, उनमें मुख्य रूप से सभी नामजद आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और उनके परिवार को 24 घंटे की पुलिस सुरक्षा प्रदान करना शामिल है। द वॉयस ऑफ बिहार की टीम इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और हम यह सवाल उठाते रहेंगे कि आखिर कब तक भागलपुर की बेटियां और बहुएं इसी तरह खाकी पर लापरवाही का आरोप लगाकर न्याय के लिए भटकती रहेंगी। क्या प्रशासन इस बार कोई ठोस कदम उठाएगा या फिर एक और मासूम जान जाने का इंतजार करेगा?

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