नई दिल्ली। लैंड फॉर जॉब घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो और उनके परिवार को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की ने सीबीआई के मामले में आरोप तय करने पर फैसला सुनाते हुए लालू यादव और उनके परिजनों समेत 40 लोगों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी।
इस केस में लालू यादव के साथ उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बेटे और तेज प्रताप यादव, बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्ज तय किए गए हैं। वहीं, कुल 98 आरोपियों में से 52 को कोर्ट ने आरोप मुक्त कर दिया है। सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि आगे ट्रायल चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
क्या है मामला
(सीबीआई) का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे, तब रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र (जबलपुर जोन) में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले जमीन ली गई। यह जमीन लालू परिवार या उनके करीबी लोगों के नाम कराई गई। एजेंसी ने इस मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत कई लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।
सीबीआई ने अदालत को यह भी बताया कि चार्जशीट में नामजद 103 आरोपियों में से पांच की मौत हो चुकी है। शेष आरोपियों के खिलाफ अब ट्रायल शुरू होगा और अदालत में सबूत पेश किए जाएंगे। वहीं, सभी आरोपियों ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है।
कोर्ट में आमने-सामने आए तेजस्वी और तेज प्रताप
सुनवाई के दौरान एक और बात चर्चा में रही। बिहार विधानसभा चुनाव के बाद तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव अलग-अलग तरीके से कोर्ट पहुंचे। दोनों आमने-सामने तो आए, लेकिन किसी ने एक-दूसरे से बात नहीं की। यह दृश्य राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा।
अदालत के आज के फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि लैंड फॉर जॉब मामले में कानूनी प्रक्रिया अब ट्रायल के चरण में प्रवेश कर चुकी है। आने वाली सुनवाइयों पर देश और बिहार की राजनीति की नजर टिकी रहेगी।


