लैंड फॉर जॉब केस: दिल्ली की अदालत में पेश हुए तेज प्रताप यादव; आरोपों को नकारा, बोले- ‘ट्रायल का सामना करने को हूँ तैयार’

द वॉयस ऑफ बिहार | नई दिल्ली/पटना (19 फरवरी 2026)

​जमीन के बदले नौकरी (Land for Job) घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में आज दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष पेश हुए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उनके खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं।

कोर्ट में क्या हुआ?

  • आरोपों से इनकार: तेज प्रताप यादव ने सीबीआई (CBI) द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया。 उन्होंने अदालत से कहा कि वे निर्दोष हैं और अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए मुकदमे (Trial) का सामना करेंगे。
  • व्यक्तिगत पेशी से छूट: कोर्ट ने औपचारिक आरोप तय करने के बाद तेज प्रताप यादव को भविष्य की सुनवाइयों के लिए व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी है。
  • 9 मार्च से नियमित सुनवाई: अदालत ने निर्देश दिया है कि मामले में अभियोजन पक्ष के साक्ष्य (Evidence) दर्ज करने की प्रक्रिया 9 मार्च 2026 से शुरू होगी, जो दैनिक आधार पर चल सकती है。

लालू-राबड़ी भी जता चुके हैं अपनी बेगुनाही

​इसी सप्ताह 16 फरवरी को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी भी इसी मामले में कोर्ट में पेश हुए थे。 उन्होंने भी अपने ऊपर लगे आरोपों को ‘राजनीति से प्रेरित’ बताते हुए खारिज किया था और ट्रायल का सामना करने की बात कही थी。

क्या है ‘लैंड फॉर जॉब’ मामला?

​यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव (2004-2009) केंद्र में रेल मंत्री थे。

  • आरोप: आरोप है कि रेलवे के विभिन्न जोन में ग्रुप-डी की नौकरियां देने के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से औने-पौने दामों पर जमीन ली गई。
  • सिंडिकेट का दावा: सीबीआई का आरोप है कि लालू यादव और उनके परिवार ने एक ‘सिंडिकेट’ की तरह काम किया और सरकारी नौकरियों का इस्तेमाल अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर अचल संपत्ति अर्जित करने के लिए किया。

प्रमुख आरोपी और स्थिति

​सीबीआई ने इस केस में लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती और हेमा यादव सहित कुल 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए हैं。 कोर्ट ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और पद के दुरुपयोग की धाराओं में आरोप तय किए हैं。

​इस मामले पर बिहार की राजनीति में भी घमासान मचा हुआ है, जहाँ विपक्षी दल इसे न्याय की प्रक्रिया बता रहे हैं, वहीं राजद इसे राजनीतिक द्वेष का हिस्सा मान रही है।

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