‘लैंड फॉर जॉब’ केस: भोला यादव की याचिका पर आज अहम सुनवाई, CBI के सरकारी गवाहों के बयान पर सवाल

राजधानी की अदालत में आज ‘लैंड फॉर जॉब’ भ्रष्टाचार मामले में एक अहम सुनवाई होने जा रही है। यह सुनवाई राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के करीबी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव की ओर से दायर याचिका पर होगी। भोला यादव इस मामले में सह-आरोपी हैं और उन्होंने सीबीआई द्वारा बनाए गए पांच सरकारी गवाहों के बयानों को अवैध बताते हुए अदालत से उन्हें अमान्य घोषित करने की मांग की है।

याचिका में क्या है भोला यादव का तर्क?

भोला यादव की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि सीबीआई ने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज करते समय कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
याचिका के मुताबिक, जिन पांच लोगों को सरकारी गवाह बनाया गया—

  • उनके बयान पहले दर्ज किए गए
  • और बाद में उन्हें माफी (Approver/Pardon) दी गई

जबकि कानून के अनुसार पहले माफी दी जानी चाहिए और उसके बाद ही बयान दर्ज किए जाने चाहिए। इस प्रक्रिया के उलट होने से गवाहों के बयान कानूनन अमान्य हो जाते हैं और उन्हें साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

इसके साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि ये बयान स्वैच्छिक नहीं हैं और गवाहों पर दबाव या प्रभाव डाला गया है। ऐसे में इन बयानों के आधार पर किसी भी तरह की दोषसिद्धि न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती।

क्या है ‘लैंड फॉर जॉब’ मामला?

‘लैंड फॉर जॉब’ मामला कथित तौर पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि रोजगार और विकास के नाम पर सरकारी जमीन के आवंटन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई और इसके बदले अवैध लाभ लिया गया।
इस मामले में कई बड़े राजनीतिक नाम सामने आए हैं और जांच एजेंसियां लंबे समय से इसकी जांच कर रही हैं। राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।

याचिका का संभावित असर

यदि अदालत यह मान लेती है कि सरकारी गवाहों के बयान अवैध हैं, तो—

  • CBI की जांच पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं
  • अभियोजन पक्ष के साक्ष्य कमजोर पड़ सकते हैं
  • मामले की सुनवाई प्रभावित या लंबी हो सकती है

वहीं, यदि अदालत याचिका को खारिज कर देती है, तो मामला अपने सामान्य कानूनी रास्ते पर आगे बढ़ेगा और गवाहों के बयान साक्ष्य के रूप में मान्य रहेंगे।

आज की सुनवाई में क्या होगी बहस?

आज की सुनवाई में मुख्य मुद्दा यही रहेगा कि—

  • क्या धारा 164 के तहत बयान दर्ज करने की प्रक्रिया कानून के अनुरूप थी या नहीं

याचिकाकर्ता पक्ष बयानों को अमान्य ठहराने की दलील देगा, जबकि CBI की ओर से यह तर्क रखा जा सकता है कि बयान स्वैच्छिक, वैध और नियमों के तहत दर्ज किए गए हैं।

राजनीतिक रूप से क्यों अहम है मामला?

इस मामले में लालू प्रसाद यादव के करीबी नेताओं के नाम जुड़े होने के कारण इसका राजनीतिक महत्व भी काफी बढ़ जाता है। अदालत का फैसला न सिर्फ कानूनी बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी दूरगामी असर डाल सकता है।


 

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