लैंड फॉर जॉब घोटाला: लालू प्रसाद समेत 16 आरोपियों पर आरोप तय करने का फैसला फिर टला, अब 31 जुलाई को होगी सुनवाई

नई दिल्ली: बहुचर्चित आईआरसीटीसी लैंड फॉर जॉब (जमीन के बदले नौकरी) मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव को फिलहाल राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने (चार्ज फ्रेम) पर फैसला एक बार फिर टाल दिया है। अब इस मामले में 31 जुलाई को अदालत अपना आदेश सुनाएगी।

इससे पहले भी अदालत कई बार इस मामले में फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनवाई की तारीख आगे बढ़ा चुकी है। अब सभी की निगाहें 31 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।

31 जुलाई को तय होंगे आरोप

विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने कहा कि आरोप तय करने के मुद्दे पर फैसला अब 31 जुलाई को सुनाया जाएगा।

मामले में अदालत पहले भी कई बार सुनवाई की तारीख बढ़ा चुकी है। इससे पूर्व फरवरी, मई और जून में भी आदेश टल चुका है।

16 आरोपी हैं मामले में शामिल

इस मामले में लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव समेत कुल 16 लोगों को आरोपी बनाया गया है। सभी के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने आरोपपत्र दाखिल किया है।

अदालत अब यह तय करेगी कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप तय कर मुकदमे की नियमित सुनवाई शुरू की जाए या नहीं।

क्या है लैंड फॉर जॉब मामला?

सीबीआई के अनुसार यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव वर्ष 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे।

जांच एजेंसी का आरोप है कि रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियां दिलाने के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई। बाद में उन जमीनों का स्वामित्व लालू प्रसाद के परिवार या उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम स्थानांतरित किया गया।

सीबीआई का कहना है कि रेलवे भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं हुईं और नौकरी के बदले जमीन लेने का अवैध लेनदेन किया गया।

आईआरसीटीसी होटल आवंटन से जुड़े आरोप भी जांच के दायरे में

जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद ने रेलवे से जुड़े दो होटलों के संचालन और आवंटन से संबंधित निर्णयों में भी कथित अनियमितताएं की थीं। एजेंसी का दावा है कि इन फैसलों से कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

हालांकि, इन सभी आरोपों से लालू प्रसाद यादव और अन्य आरोपी लगातार इनकार करते रहे हैं।

आरोप तय होने के बाद शुरू होगा ट्रायल

कानूनी प्रक्रिया के अनुसार यदि अदालत आरोप तय करती है, तो इसके बाद मामले का नियमित ट्रायल शुरू होगा। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष अपने साक्ष्य और गवाह पेश करेगा, जबकि बचाव पक्ष को भी अपनी दलीलें रखने का पूरा अवसर मिलेगा।

फिलहाल अदालत ने आरोप तय करने पर फैसला सुरक्षित रखते हुए अगली सुनवाई 31 जुलाई के लिए निर्धारित की है। इस मामले पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर नजर बनी हुई है।

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