
द वॉयस ऑफ बिहार | लखीसराय (19 फरवरी 2026)
लखीसराय की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया, जब पुलिस ने नगर परिषद के उपसभापति शिवशंकर राम को गिरफ्तार कर लिया। उपसभापति पर जाली दस्तावेजों के सहारे कीमती जमीन हड़पने और कोर्ट को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगा है।
क्या है पूरा मामला?
यह कार्रवाई लोदिया निवासी प्रशांत कुमार द्वारा दर्ज कराई गई लिखित शिकायत और उसके बाद हुई जांच के आधार पर की गई है।
- विवाद की जड़: मामला वर्ष 1972 के एक पुराने दस्तावेज से जुड़ा है। उपसभापति पर आरोप है कि उन्होंने एक कथित ‘दानपत्र’ के आधार पर विवादित जमीन की जमाबंदी अपने नाम कायम करा ली थी।
- दस्तावेजों में हेराफेरी: जब इस मामले की गहराई से जांच हुई, तो निबंधन कार्यालय (रजिस्ट्री ऑफिस) के रिकॉर्ड ने पोल खोल दी। कार्यालय के आधिकारिक पत्र के अनुसार, जिस दस्तावेज को उपसभापति ‘दानपत्र’ बता रहे थे, वह असल में ‘बंधक विलेख’ (Mortgage Deed) था।
अवैध कब्जे और धोखाधड़ी का आरोप
शिकायतकर्ता प्रशांत कुमार ने अपनी प्राथमिकी में कई गंभीर तथ्य सामने रखे हैं:
- अवैध कब्जा: जाली दानपत्र को आधार बनाकर उपसभापति ने संबंधित भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करने का प्रयास किया।
- कोर्ट को गुमराह करना: आरोप है कि इस जमीन से जुड़े कानूनी विवादों में न्यायालय के समक्ष भी भ्रामक और गलत जानकारी प्रस्तुत की गई ताकि फैसला पक्ष में कराया जा सके।
- प्रशासनिक मिलीभगत: बंधक विलेख को दानपत्र दिखाकर जमाबंदी कायम कराने के पीछे राजस्व कर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पुलिस की कार्रवाई
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद लखीसराय पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए उपसभापति को उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह धोखाधड़ी और जालसाजी का स्पष्ट मामला है।
लखीसराय नगर परिषद के एक वरिष्ठ पदाधिकारी की इस तरह गिरफ्तारी होने के बाद शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस खेल में और कौन-कौन से भू-माफिया या कर्मचारी शामिल थे।
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