
किशनगंज, 19 अप्रैल 2026। बिहार के किशनगंज में आय से अधिक संपत्ति के बहुचर्चित मामले ने एक बार फिर नया और रहस्यमय मोड़ ले लिया है। पूर्व एसडीपीओ से जुड़े मामले की जांच के बीच शनिवार देर रात हुई एक संदिग्ध घटना ने पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। आधी रात को एसडीपीओ कार्यालय परिसर में एक लाल रंग की थार गाड़ी की एंट्री और उसमें सवार लोगों की गतिविधियों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना शनिवार देर रात की बताई जा रही है, जब अनुमंडल कार्यालय परिसर स्थित एसडीपीओ कार्यालय में बीआर 11 बीबी 7973 नंबर की लाल थार अचानक दाखिल हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गाड़ी में तीन लोग सवार थे, जो बिना किसी औपचारिक अनुमति के सीधे कार्यालय के अंदर चले गए। बताया जा रहा है कि वे करीब 10 से 15 मिनट तक अंदर रहे और फिर तेजी से बाहर निकलने लगे।
रात के समय सरकारी कार्यालय में इस तरह की संदिग्ध गतिविधि ने वहां तैनात पुलिसकर्मियों को सतर्क कर दिया। जैसे ही वाहन बाहर निकलने लगा, ड्यूटी पर मौजूद जवानों ने संदेह के आधार पर गाड़ी को रोक लिया और उसमें सवार लोगों से पूछताछ शुरू की। पूछताछ के दौरान उनकी पहचान मोहम्मद हबीब (किशनगंज निवासी), सौदागर (पूर्णिया निवासी, चालक) और एक नाबालिग के रूप में हुई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी मुख्यालय सह प्रभारी एसडीपीओ मंगलेश कुमार और स्थानीय थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। तीनों को हिरासत में लेकर थार गाड़ी समेत सदर थाना ले जाया गया, जहां उनसे गहन पूछताछ की जा रही है।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने जो सफाई दी, उसने मामले को और उलझा दिया। उनका कहना है कि वे एसडीपीओ कार्यालय में “एसी खोलने” गए थे। हालांकि पुलिस इस दावे को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। अधिकारियों का मानना है कि आधी रात को बिना अनुमति सरकारी कार्यालय में प्रवेश करना और फिर कुछ ही मिनटों में बाहर निकलना कई तरह की आशंकाओं को जन्म देता है।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम को पूर्व एसडीपीओ से जुड़े आय से अधिक संपत्ति मामले के संदर्भ में भी देख रही हैं। आशंका जताई जा रही है कि कहीं यह किसी महत्वपूर्ण दस्तावेज या सबूत को हटाने या नष्ट करने की कोशिश तो नहीं थी। हालांकि इस बात की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस समय और तरीके से यह घटना हुई, उसने संदेह को और गहरा कर दिया है।
दरअसल, आर्थिक अपराध इकाई (EOU) पहले से ही गौतम कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले की जांच कर रही है। 29 मार्च 2026 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद 31 मार्च को किशनगंज, पूर्णिया समेत छह अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई थी।
जांच एजेंसियों के अनुसार, गौतम कुमार ने अपनी सेवा अवधि के दौरान करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित की है, जो उनकी आय के स्रोतों से कहीं अधिक बताई जा रही है। यह संपत्ति विभिन्न शहरों में फैली हुई है और इसमें जमीन, मकान, बैंक खातों और अन्य निवेश शामिल हैं। छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन से जुड़े सुराग भी मिले थे।
इसी क्रम में हाल ही में EOU की टीम ने दोबारा किशनगंज पहुंचकर गाड़ियों की खरीद-बिक्री से जुड़े पहलुओं की भी जांच शुरू की है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस संदिग्ध थार गाड़ी का संबंध भी इसी नेटवर्क से तो नहीं है। हालांकि अब तक इस गाड़ी और गौतम कुमार के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं हो पाया है, लेकिन पुलिस हर एंगल से मामले की पड़ताल कर रही है।
इस पूरे मामले पर किशनगंज के पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार ने कहा कि फिलहाल हिरासत में लिए गए तीनों लोगों से पूछताछ जारी है। उन्होंने बताया कि आरोपियों ने एसी खोलने की बात कही है, लेकिन पुलिस इस मामले को हल्के में नहीं ले रही है और हर पहलू की गहराई से जांच की जा रही है।
एसपी ने यह भी स्पष्ट किया कि पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि किसी तरह की आपराधिक साजिश या सबूतों से छेड़छाड़ की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने पहले से चल रही जांच को और ज्यादा रहस्यमय बना दिया है। एक ओर जहां आय से अधिक संपत्ति का मामला पहले ही सुर्खियों में है, वहीं अब देर रात सरकारी कार्यालय में संदिग्ध प्रवेश ने पूरे मामले में नई परत जोड़ दी है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर आधी रात को इस तरह की एंट्री कैसे संभव हुई और क्या सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक हुई है।
कुल मिलाकर, किशनगंज का यह मामला अब केवल आय से अधिक संपत्ति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें साजिश, सबूतों से छेड़छाड़ और प्रशासनिक लापरवाही जैसे कई गंभीर पहलू जुड़ते जा रहे हैं।
अब सभी की नजर पुलिस और EOU की जांच पर टिकी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जो न केवल इस केस की दिशा तय करेंगे, बल्कि बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी असर डाल सकते हैं।


