
पटना/किशनगंज: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के बीच एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने किशनगंज के टाउन थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर अभिषेक कुमार रंजन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच ठिकानों पर छापेमारी की। इस छापेमारी में करोड़ों की संपत्ति, भारी निवेश और कई संदिग्ध लेन-देन के सबूत सामने आए हैं।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आरोप है कि एक इंस्पेक्टर ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से भी ज्यादा संपत्ति अर्जित कर ली। शुरुआती जांच में 20 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के संकेत मिले हैं, जिनमें कई संपत्तियां बेनामी होने की आशंका जताई जा रही है।
‘डीएसपी से आगे निकला थानेदार’
बिहार पुलिस में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है कि एक इंस्पेक्टर ने अपने सेवा काल में इतनी बड़ी संपत्ति कैसे बना ली। अभिषेक कुमार रंजन वर्ष 2009 में दरोगा के रूप में बहाल हुए थे और 2023 में प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर बने।
अपने कार्यकाल के दौरान वे मुजफ्फरपुर, मोतिहारी, पटना और किशनगंज जैसे महत्वपूर्ण जिलों में पदस्थापित रहे। आर्थिक अपराध इकाई की जांच में यह आरोप सामने आया है कि उन्होंने आय से लगभग 1.70 करोड़ रुपये अधिक की संपत्ति अर्जित की, लेकिन छापेमारी में जो संकेत मिले हैं, वे इससे कहीं ज्यादा बड़े हैं।
पटना, छपरा और गांव में आलीशान संपत्ति
EOU की टीम ने जब उनके ठिकानों की तलाशी ली, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
- पटना के रामकृष्णा नगर में 2200 वर्ग फीट में बना मकान मिला, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 2 करोड़ रुपये बताई जा रही है
- छपरा शहर में 1400 वर्ग फीट का मकान, जिसकी कीमत करीब 30 लाख रुपये है
- पैतृक गांव में दो मंजिला मकान निर्माणाधीन है
इन संपत्तियों का निर्माण अलग-अलग समय पर किया गया, लेकिन इनके वित्तीय स्रोतों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
सिलीगुड़ी में 84 लाख कैश देकर खरीदी जमीन
इस मामले का सबसे बड़ा खुलासा पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि इंस्पेक्टर ने दार्जिलिंग रोड पर छह कट्ठा जमीन खरीदी है।
- जमीन की कीमत लगभग 17 लाख रुपये प्रति कट्ठा बताई गई
- कुल भुगतान में से 84 लाख रुपये नकद दिए गए
- जमीन की बाउंड्री भी कराई जा चुकी है
कैश में इतनी बड़ी राशि का भुगतान जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गया है। अब इस लेन-देन के स्रोत और वैधता की जांच की जा रही है।
मुजफ्फरपुर में करोड़ों का निवेश
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अभिषेक कुमार रंजन ने मुजफ्फरपुर में बड़े पैमाने पर जमीन में निवेश किया है।
- अहियापुर थाना क्षेत्र के चंदवारा में तीन कट्ठा जमीन खरीदी
- रजिस्ट्री में कम कीमत दिखाकर असली निवेश छिपाने की आशंका
- कुल निवेश 20 करोड़ रुपये से अधिक होने के संकेत
जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि वे जमीन कारोबार से जुड़े लोगों के संपर्क में थे और संभवतः ‘लैंड सिंडिकेट’ का हिस्सा भी रहे हैं।
बैंक बैलेंस, निवेश और परिवार के नाम संपत्ति
छापेमारी में उनकी पत्नी अंकिता कुमारी के बैंक खातों और निवेश का भी खुलासा हुआ।
- बैंक खाते में लगभग 8.5 लाख रुपये जमा
- LIC में हर साल 1 लाख रुपये का निवेश
- म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में करीब 20 लाख रुपये लगाए गए
इन निवेशों के स्रोत और आय के हिसाब से उनकी वैधता की जांच की जा रही है।
लग्जरी लाइफस्टाइल के भी मिले सबूत
जांच के दौरान इंस्पेक्टर की जीवनशैली भी सवालों के घेरे में आ गई है।
- महंगे मोबाइल फोन और लग्जरी सामान
- परिवार के साथ हवाई यात्रा
- मुंबई के पांच सितारा होटल (ताज) में ठहरने के प्रमाण
- बच्चों की पढ़ाई महंगे स्कूलों में
यह सभी खर्च उनकी घोषित आय से कहीं अधिक बताए जा रहे हैं।
शिक्षा और खर्च का भी खुलासा
तलाशी में यह भी पता चला कि उन्होंने अपने बेटे का एडमिशन सिलीगुड़ी के एक प्रतिष्ठित स्कूल में कराया है, जिसके लिए करीब ढाई लाख रुपये फीस दी गई।
इस तरह के खर्च उनके आर्थिक प्रोफाइल को और संदिग्ध बनाते हैं।
ट्रक, फ्लैट और बेनामी संपत्ति
जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि:
- 6 से 7 ट्रकों की खरीद की गई है
- सिलीगुड़ी के सेवक रोड पर फ्लैट होने की संभावना
- कई संपत्तियां दूसरों के नाम पर (बेनामी) हो सकती हैं
इन सभी तथ्यों की गहन जांच जारी है।
EOU की आगे की कार्रवाई
आर्थिक अपराध इकाई ने साफ किया है कि यह जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
- सभी संपत्तियों का मूल्यांकन किया जाएगा
- बैंक खातों और लेन-देन की जांच होगी
- बेनामी संपत्ति की पहचान की जाएगी
- जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारी भी हो सकती है
पुलिस महकमे में मची हलचल
इस कार्रवाई के बाद बिहार पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। हाल ही में एक डीएसपी पर भी कार्रवाई हुई थी, और अब एक इंस्पेक्टर पर इतनी बड़ी रेड ने यह संकेत दिया है कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपना रही है।
बड़ा सवाल: सिस्टम में कहां है खामी?
यह मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।
- इतनी बड़ी संपत्ति कैसे अर्जित हुई?
- क्या निगरानी व्यवस्था कमजोर है?
- क्या राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण मिला?
इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
किशनगंज के इंस्पेक्टर अभिषेक कुमार रंजन पर हुई यह कार्रवाई बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी पहल मानी जा रही है। शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों से यह साफ है कि मामला बेहद गंभीर है और इसमें कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसियां इस केस को किस अंजाम तक पहुंचाती हैं और क्या इस कार्रवाई से सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।


