
कटिहार | 20 मार्च 2026: बिहार के कटिहार रेलवे स्टेशन पर एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां शराब तस्करों को पकड़ने गई टीम खुद विवाद में फंस गई। आबकारी विभाग और रेलवे पुलिस (GRP) के जवानों के बीच हुई झड़प ने कानून-व्यवस्था और विभागीय समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तस्करी रोकने की कार्रवाई बनी विवाद की वजह
जानकारी के अनुसार, आबकारी विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि पश्चिम बंगाल की ओर से आने वाली ट्रेन के जरिए शराब की बड़ी खेप कटिहार लाई जा रही है। इस सूचना के आधार पर विभाग की टीम रेलवे स्टेशन पहुंची और संदिग्धों को पकड़ने के लिए निगरानी शुरू की।
GRP से हुआ टकराव
बताया जा रहा है कि इसी दौरान GRP के जवान मौके पर पहुंचे और कार्रवाई में हस्तक्षेप करने लगे। शुरुआत में दोनों पक्षों के बीच बहस हुई, लेकिन देखते ही देखते मामला हाथापाई तक पहुंच गया।
वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि GRP के जवान एक व्यक्ति को पकड़कर खींचते नजर आ रहे हैं, जिसकी पहचान आबकारी विभाग के सिपाही देव शंकर झा के रूप में बताई जा रही है।
सिपाही का आरोप: “काम करने से रोक रहे थे”
घटना के बाद घायल और विवाद में शामिल सिपाही ने आरोप लगाया कि आबकारी टीम लगातार शराब तस्करों के खिलाफ कार्रवाई कर रही थी, जिससे कुछ लोगों को आपत्ति थी।
उन्होंने कहा, “हमें सूचना मिली थी कि ट्रेन से शराब लाई जा रही है। हम लोग लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। लेकिन GRP को इस बात से परेशानी थी कि हम ज्यादा शराब जब्त कर रहे हैं, इसलिए उन्होंने हमारे साथ दुर्व्यवहार किया।”
स्टेशन पर मचा हड़कंप
घटना के दौरान रेलवे स्टेशन पर मौजूद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। अचानक हुई झड़प से लोग घबरा गए और कई लोग मौके से हटने लगे। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
समन्वय की कमी पर सवाल
यह घटना इस बात को उजागर करती है कि अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय की कमी किस तरह बड़ी समस्या बन सकती है। जहां एक ओर सरकार शराब तस्करी पर सख्ती बरत रही है, वहीं दूसरी ओर विभागों के बीच तालमेल की कमी ऐसे हालात पैदा कर रही है।
जांच की मांग
मामले के सामने आने के बाद उच्च अधिकारियों से जांच की मांग उठने लगी है। उम्मीद जताई जा रही है कि पूरे घटनाक्रम की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
कटिहार की यह घटना सिर्फ एक झड़प नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर मौजूद खामियों की ओर इशारा करती है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या सुधार किए जाते हैं।


