
मनिहारी (कटिहार)। बिहार के सीमावर्ती जिले कटिहार के मनिहारी थाना क्षेत्र में इन दिनों सन्नाटा और सुगबुगाहट का एक अजीब मिश्रण देखने को मिल रहा है। नवाबगंज बालू टोला का एक साधारण सा दिखने वाला युवक, मोहम्मद सोहेल, अब देश की राजधानी दिल्ली की पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर है। 17 अप्रैल 2026 को दिल्ली में हुई सोहेल की गिरफ्तारी की खबर जैसे ही गंगा के किनारे बसे इस शांत कस्बे में पहुँची, चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। यह मामला केवल एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल निगरानी के उन पेचीदा गलियारों से जुड़े नजर आ रहे हैं, जहाँ खुफिया एजेंसियां अक्सर ‘साइलेंट ऑपरेशन्स’ को अंजाम देती हैं। जहाँ एक तरफ दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल या संबंधित विंग सोहेल से कड़ी पूछताछ कर रही है, वहीं मनिहारी के बालू टोला में एक मां की चीखें और पिता की बेबसी न्याय की गुहार लगा रही है। परिजनों का दावा है कि सोहेल केवल मेहनत-मजदूरी करने वाला एक सीधा-साधा युवक है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के पास मौजूद ‘डिजिटल सबूत’ कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
10 अप्रैल की वह रात: जब मनिहारी में खटखटाया गया सोहेल का दरवाजा
इस पूरे घटनाक्रम की पटकथा 10 अप्रैल 2026 की रात को लिखी गई थी। मनिहारी जैसे सुदूर इलाके में जब लोग गहरी नींद में थे, तब इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और दिल्ली पुलिस की एक संयुक्त टीम ने नवाबगंज बालू टोला में दस्तक दी। स्थानीय पुलिस को विश्वास में लेकर की गई इस छापेमारी का केंद्र मोहम्मद मुमताज का घर था। सुरक्षाकर्मियों ने मुमताज के पुत्र मोहम्मद सोहेल को अपनी हिरासत में लिया और घंटों तक अज्ञात स्थान पर पूछताछ की।
परिजनों के अनुसार, 11 अप्रैल की सुबह सोहेल को यह कहकर छोड़ दिया गया कि जांच पूरी हो चुकी है। हालांकि, जाते समय जांच टीम ने सोहेल का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया। यह मोबाइल फोन ही इस पूरी जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुआ। बताया जा रहा है कि फोन की शुरुआती फॉरेंसिक जांच और डेटा विश्लेषण के दौरान कुछ ऐसी ‘डिजिटल गतिविधियों’ के सुराग मिले, जिन्होंने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए। यही वजह थी कि सोहेल को दिल्ली बुलाने का फैसला किया गया।
दिल्ली का बुलावा और गिरफ्तारी का घटनाक्रम
11 अप्रैल को रिहा होने के बाद सोहेल और उसका परिवार थोड़ा सामान्य हुआ ही था कि 14 अप्रैल को उसे दिल्ली आने का फरमान सुना दिया गया। जांच एजेंसियों ने उसे पहचान की प्रक्रिया और विस्तृत पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया था। सोहेल अपने पिता मुमताज और अपने एक चचेरे भाई के साथ दिल्ली पहुँचा। परिजनों को उम्मीद थी कि पूछताछ के बाद उसे वापस घर भेज दिया जाएगा, लेकिन दिल्ली के सुरक्षा गलियारों में कुछ और ही पक रहा था।
14 से 17 अप्रैल तक सोहेल से अलग-अलग दौर की लंबी पूछताछ की गई। सूत्रों की मानें तो सोहेल के मोबाइल से मिले कुछ सोशल मीडिया चैट्स, संदेहास्पद लिंक्स या किसी विशेष ऑनलाइन समूह से जुड़ाव के बारे में उससे स्पष्टीकरण मांगा गया। जब सोहेल के जवाब सुरक्षा एजेंसियों के तकनीकी साक्ष्यों से मेल नहीं खाए, तो 17 अप्रैल 2026 को दिल्ली पुलिस ने उसे आधिकारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी की सूचना जब मनिहारी पहुँची, तो पूरे इलाके में खलबली मच गई। मुमताज और उनका चचेरा भाई अभी भी दिल्ली में ही रहकर कानूनी मदद की तलाश कर रहे हैं।
अंगूरी खातून की ममता और न्याय की गुहार
मनिहारी के बालू टोला में सोहेल की मां, अंगूरी खातून, का रो-रोकर बुरा हाल है। अपने बेटे की गिरफ्तारी से टूट चुकी अंगूरी खातून ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखते हुए सोहेल को पूरी तरह बेकसूर बताया। उन्होंने रुंधे गले से कहा, “मेरा बेटा कोई अपराधी नहीं है। वह तो अपने पिता के साथ हाथ बंटाता है। हम लोग प्लंबर का काम करके अपना पेट पालते हैं। हमारी आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि हम दो वक्त की रोटी के लिए भी संघर्ष करते हैं। सोहेल दिन भर मेहनत करता है और रात को घर आकर सो जाता है। वह किसी गलत काम में शामिल होने के बारे में सोच भी नहीं सकता।”
अंगूरी खातून का आरोप है कि उनके बेटे को किसी साजिश के तहत फंसाया जा रहा है या फिर मोबाइल फोन के इस्तेमाल में हुई किसी अनजानी गलती को बड़ा अपराध मान लिया गया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सोहेल के पिछले रिकॉर्ड को देखा जाए। मां का कहना है कि सोहेल का मनिहारी या कटिहार में कभी किसी विवाद में नाम नहीं आया। वह केवल एक मजदूर है और उसे न्याय मिलना चाहिए। घर के अन्य सदस्यों का भी कहना है कि सोहेल तकनीकी रूप से इतना साक्षर नहीं है कि वह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा बन सके।
डिजिटल पदचिह्न: जांच एजेंसियों के शक की सुई
भले ही परिवार सोहेल की मासूमियत की दुहाई दे रहा हो, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का नजरिया तकनीकी साक्ष्यों पर आधारित है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, सोहेल के मोबाइल फोन की जांच के दौरान कुछ ऐसी डिजिटल गतिविधियों के प्रमाण मिले हैं जो सामान्य नहीं हैं। इंटरनेट के दौर में सीमावर्ती जिलों के युवाओं का सोशल मीडिया के जरिए संदेहास्पद तत्वों के संपर्क में आना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है।
जांच इस बिंदु पर केंद्रित है कि क्या सोहेल किसी ‘स्लीपर सेल’ के संपर्क में था या अनजाने में किसी ऐसे प्लेटफॉर्म का हिस्सा बन गया था जहाँ राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की योजना बनाई जा रही थी? अक्सर तस्कर या कट्टरपंथी तत्व सीमावर्ती इलाकों के गरीब युवाओं को आर्थिक लालच देकर अपना मोहरा बनाते हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि सोहेल के खाते में कहीं से कोई संदिग्ध ट्रांजेक्शन तो नहीं हुआ है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरोपों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन जिस तरह से आईबी ने इस ऑपरेशन को लीड किया, वह मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
स्थानीय प्रतिक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था पर प्रभाव
मनिहारी के नवाबगंज इलाके में सोहेल की गिरफ्तारी के बाद एक अजीब सा डर व्याप्त है। स्थानीय लोगों के लिए यह विश्वास करना कठिन हो रहा है कि उनके बीच रहने वाला एक प्लंबर दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में है। पड़ोसियों का कहना है कि सोहेल का व्यवहार हमेशा सामान्य रहा है और वह कभी किसी संदिग्ध गतिविधि में नहीं देखा गया। स्थानीय निवासियों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर वह बेगुनाह है तो उसे तुरंत छोड़ा जाना चाहिए, क्योंकि उसके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है।
दूसरी ओर, कटिहार जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस भी इस मामले पर नजर बनाए हुए है। मनिहारी जैसे इलाके, जो पश्चिम बंगाल और झारखंड की सीमाओं से सटे हैं, सुरक्षा की दृष्टि से काफी संवेदनशील माने जाते हैं। सोहेल की गिरफ्तारी के बाद अब स्थानीय खुफिया तंत्र भी सक्रिय हो गया है और सोहेल के दोस्तों व करीबी रिश्तेदारों की गतिविधियों की भी गुपचुप तरीके से जानकारी जुटाई जा रही है।
आगे की राह और कानूनी प्रक्रिया
फिलहाल मोहम्मद सोहेल दिल्ली पुलिस की रिमांड पर है। आने वाले दिनों में उसे न्यायालय में पेश किया जाएगा, जहाँ पुलिस उसकी और अधिक दिनों की कस्टडी मांग सकती है ताकि डिजिटल साक्ष्यों का सामना सोहेल से कराया जा सके। परिवार के पास सीमित संसाधन हैं, ऐसे में दिल्ली जैसे शहर में कानूनी लड़ाई लड़ना उनके लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
यह मामला एक बार फिर उस कड़वे सच को उजागर करता है जहाँ आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया का जाल अनजाने में छोटे शहरों के युवाओं को बड़े विवादों में खींच लेता है। सोहेल बेकसूर है या वह किसी बड़े खेल का हिस्सा, यह तो जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन इस गिरफ्तारी ने मनिहारी के उस छोटे से घर की खुशियां छीन ली हैं जहाँ अब केवल सिसकियां गूँज रही हैं। पूरे कटिहार जिले की नजरें अब दिल्ली से आने वाली अगली आधिकारिक सूचना पर टिकी हैं।


