कटिहार में चला अब तक का सबसे बड़ा बुलडोजर अभियान, महंत नगर से 8 एकड़ से अधिक जमीन कराई गई खाली

कटिहार। बिहार के कटिहार जिले में रविवार को प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा अभियान चलाते हुए महंत नगर इलाके में बड़े पैमाने पर बुलडोजर कार्रवाई की। नगर थाना क्षेत्र स्थित इस इलाके में वर्षों से बसे लोगों के आशियाने कुछ ही घंटों में मलबे में तब्दील हो गए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने भारी पुलिस बल और 10 बड़े बुलडोजरों के साथ अभियान चलाकर करीब 8 एकड़ 56 डिसमिल जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया।

सुबह से ही महंत नगर इलाके में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई थी। जिला प्रशासन, पुलिस और नगर निकाय की संयुक्त टीम भारी सुरक्षा व्यवस्था के साथ मौके पर पहुंची। बुलडोजरों की लंबी कतार और बड़ी संख्या में पुलिस बल को देखकर इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जैसे ही अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई, स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया।

अधिकारियों के मुताबिक, यह जमीन लंबे समय से विवादों में थी और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। हाल ही में सर्वोच्च अदालत ने महंत मदन कुमार दास के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसके बाद प्रशासन को जमीन खाली कराने का निर्देश मिला। अदालत के आदेश के पालन में प्रशासन ने यह व्यापक कार्रवाई की।

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि जमीन पर वर्षों से अवैध कब्जा किया गया था। कई लोगों ने यहां स्थायी और अस्थायी निर्माण कर लिए थे। कुछ परिवार लंबे समय से इस इलाके में रह रहे थे। कार्रवाई के दौरान मकान, झोपड़ियां, दुकानों और अन्य ढांचों को बुलडोजरों की मदद से हटाया गया।

जैसे ही बुलडोजर आगे बढ़े, इलाके में चीख-पुकार और विरोध शुरू हो गया। कई महिलाएं और बुजुर्ग अपने घरों को टूटता देख भावुक हो गए। कुछ लोग अपने सामान को बचाने की कोशिश करते नजर आए, जबकि कई परिवार सड़क किनारे बैठकर रोते दिखाई दिए। स्थानीय लोगों का आरोप था कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया और अचानक कार्रवाई शुरू कर दी गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई परिवारों ने प्रशासन से मोहलत देने की मांग की, लेकिन अधिकारियों ने साफ कहा कि वे अदालत के आदेश का पालन कर रहे हैं और कार्रवाई टाली नहीं जा सकती। कुछ लोगों ने बुलडोजरों के सामने खड़े होकर विरोध भी किया, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।

कार्रवाई के दौरान कई बार माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थानीय निवासियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुला लिया। पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया ताकि किसी प्रकार की हिंसा या अप्रिय घटना न हो।

जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि अदालत के आदेश के पालन में यह कार्रवाई पूरी पारदर्शिता के साथ की गई है। अधिकारियों का कहना था कि यह जमीन विवाद वर्षों पुराना था और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कार्रवाई की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और न्यायालय के आदेश का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई परिवार दशकों से वहां रह रहे थे। उनका आरोप है कि प्रशासन ने पुनर्वास या वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर कोई स्पष्ट योजना नहीं बताई। बेघर हुए परिवार अब अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। कई लोगों ने कहा कि उनके पास रहने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं है।

वहीं प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई से पहले कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई थी और संबंधित लोगों को नोटिस भी जारी किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार, अतिक्रमण हटाने के बाद जमीन को मूल पक्षकार को सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय संगठनों ने भी इस कार्रवाई पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कुछ लोगों ने अदालत के आदेश के पालन को जरूरी बताया, जबकि कुछ ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना है कि वर्षों से रह रहे परिवारों के पुनर्वास को लेकर सरकार को संवेदनशील कदम उठाने चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार के कई शहरों में जमीन विवाद और अतिक्रमण लंबे समय से बड़ी समस्या बने हुए हैं। अदालतों में वर्षों तक चलने वाले मुकदमों के बाद जब फैसले आते हैं, तब इस तरह की बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करनी पड़ती है। हालांकि ऐसी कार्रवाइयों के दौरान मानवीय संकट भी सामने आता है।

कटिहार में हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर अतिक्रमण, शहरी नियोजन और पुनर्वास नीति को लेकर बहस तेज कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को पहले वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए थी। वहीं अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था और न्यायालय के आदेशों का पालन करना उनकी जिम्मेदारी है।

पूरे अभियान के दौरान जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद रहे। पुलिस बल ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है ताकि कार्रवाई के बाद किसी तरह का तनाव या विरोध प्रदर्शन न हो सके। एहतियात के तौर पर महंत नगर और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात रखा गया है।

कार्रवाई के बाद इलाके का दृश्य पूरी तरह बदल गया। जहां कभी घर और दुकानें थीं, वहां अब मलबा और टूटी दीवारें नजर आ रही हैं। कई परिवार खुले आसमान के नीचे अपना सामान समेटते दिखाई दिए। बच्चों और महिलाओं की आंखों में भविष्य को लेकर चिंता साफ देखी जा सकती थी।

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में जिले के अन्य विवादित और अतिक्रमित इलाकों में भी इसी तरह की कार्रवाई हो सकती है। इसके लिए संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी गई है।

कटिहार का यह बुलडोजर अभियान केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं बल्कि कानून, प्रशासन और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन की चुनौती बनकर सामने आया है। अब पूरे मामले पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं भी तेज होने की संभावना है।

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