कटिहार के कदवा में खूनी संघर्ष के बाद पुलिस का एक्शन: गोलीकांड और उपद्रव मामले में 12 घंटे के अंदर 13 गिरफ्तार

कटिहार। बिहार के कटिहार जिले के कदवा थाना क्षेत्र में हुए भीषण गोलीकांड और उसके बाद उपजी भारी हिंसा के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। भोगांव गांव में एक महिला और मासूम बच्ची को गोली मारे जाने के बाद भड़के जनाक्रोश और पुलिस पर हुए हमले के मामले में कटिहार पुलिस ने महज 12 घंटों के भीतर ताबड़तोड़ छापेमारी कर कुल 13 आरोपितों को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है। 17 अप्रैल 2026 की दोपहर पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन गांव में भारी पुलिस बल की तैनाती बनी हुई है। यह पूरी घटना 15 अप्रैल को तब शुरू हुई जब एक सनकी व्यक्ति ने आपसी विवाद में गोली चला दी, जिसके बाद पूरा इलाका रणक्षेत्र में तब्दील हो गया था। उग्र भीड़ ने न केवल आगजनी और तोड़फोड़ की, बल्कि स्थिति संभालने पहुँची पुलिस टीम पर भी जानलेवा पथराव किया। कटिहार पुलिस ने इस मामले में दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की है—एक मूल गोलीकांड के लिए और दूसरी कानून-व्यवस्था भंग करने वाले उपद्रवियों के खिलाफ।

भोगांव में खूनी खेल: एक कॉल और दहशद में डूबा गांव

​घटना की शुरुआत 15 अप्रैल 2026 को हुई, जब भोगांव गांव में मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि गांव के ही एक व्यक्ति ने सरेआम फायरिंग की, जिसमें एक महिला और एक छोटी बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गए। गोली की गूँज सुनते ही पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई। घायलों को खून से लथपथ देखकर स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। जैसे ही यह खबर फैली कि एक मासूम को निशाना बनाया गया है, सैकड़ों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए।

​सूचना मिलते ही कदवा थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुँची, लेकिन तब तक वहां ‘भीड़तंत्र’ हावी हो चुका था। उग्र भीड़ ने आरोपी के घर की घेराबंदी कर ली थी और वहां जमकर आगजनी और तोड़फोड़ की जा रही थी। लोगों का गुस्सा इस कदर था कि वे आरोपी और उसके परिवार को भीड़ के हवाले करने की मांग कर रहे थे। पुलिस के लिए यह दोहरी चुनौती थी—एक ओर घायलों को अस्पताल पहुँचाना और दूसरी ओर आरोपी के परिवार को ‘लिंचिंग’ से बचाना।

पुलिस पर पथराव और ‘रेस्क्यू ऑपरेशन’

​भीड़ की उग्रता को देखते हुए पुलिस ने जब स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, तो उपद्रवियों ने पुलिस को ही अपना निशाना बना लिया। खाकी पर भारी पथराव किया गया, जिसमें कई जवानों को चोटें आईं। बावजूद इसके, पुलिस ने साहस का परिचय देते हुए घेराबंदी तोड़कर आरोपी और उसके परिवार के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाला और उन्हें हिरासत में लिया। यदि पुलिस समय पर यह ‘रेस्क्यू ऑपरेशन’ नहीं करती, तो भोगांव में बड़ी अनहोनी हो सकती थी।

​भीड़ ने आरोपी के घर के बाहर खड़े वाहनों और कीमती सामानों को आग के हवाले कर दिया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कटिहार जिला मुख्यालय से अतिरिक्त पुलिस बल मंगाया गया। घंटों की मशक्कत के बाद आंसू गैस के गोलों और हल्के बल प्रयोग के जरिए भीड़ को तितर-बितर किया गया। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर इलाके में गश्त तेज कर दी गई और उपद्रवियों की पहचान के लिए वीडियोग्राफी का सहारा लिया गया।

12 घंटे का डेडलाइन और 13 गिरफ्तारियों का ब्योरा

​कटिहार पुलिस ने इस पूरी घटना को चुनौती के रूप में लिया और 12 घंटे के भीतर अपराधियों को दबोचने का लक्ष्य रखा। पुलिस ने दो अलग-अलग कांड दर्ज किए हैं। कांड संख्या 146/26 मुख्य गोलीकांड से संबंधित है, जबकि कांड संख्या 147/26 पुलिस पर हमले और सरकारी कार्य में बाधा डालने (उपद्रव) से संबंधित है।

गोलीकांड (कांड संख्या-146/26) में गिरफ्तार 04 मुख्य आरोपी:

  1. सुनील साह (38 वर्ष): पिता- गौर साह। यह इस घटना का मुख्य सूत्रधार माना जा रहा है।
  2. रंजित साह (35 वर्ष): पिता- गौर साह।
  3. लवली सिंह (28 वर्ष): पति- सुनील साह।
  4. निशा सिंह (35 वर्ष): पति- जीवछ साह।

​इन चारों पर सीधे तौर पर महिला और बच्ची को जान से मारने की नीयत से हमला करने और आपराधिक साजिश रचने का आरोप है। पुलिस इनसे गहन पूछताछ कर रही है कि आखिर गोलीबारी के पीछे का वास्तविक विवाद क्या था और हथियार कहाँ से आए।

उपद्रव और कानून-व्यवस्था भंग करने वाले 09 गिरफ्तार

​गोलीकांड के बाद जिस भीड़ ने कानून को अपने हाथ में लिया और पुलिस पर हमला किया, उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की गई है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के आधार पर कांड संख्या-147/26 के तहत भोगांव वार्ड संख्या 02 और 03 से कुल 09 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है:

  • प्रियतम कुमार (22 वर्ष): पिता- पवन सिंह।
  • तपन कुमार (23 वर्ष): पिता- स्वर्गीय बिरेन्द्र सिंह।
  • अमरजीत कुमार (26 वर्ष): पिता- जयप्रकाश सिंह।
  • अजय कुमार सिंह (41 वर्ष): पिता- महेश सिंह।
  • जयप्रकाश सिंह (41 वर्ष): पिता- स्वर्गीय सतीश सिंह।
  • अमन कुमार सिंह (22 वर्ष): पिता- जयप्रकाश सिंह।
  • मिथलेश कुमार सिंह (30 वर्ष): पिता- अर्जुन सिंह।
  • अशोक सिंह (40 वर्ष): पिता- राजेन्द्र सिंह।
  • चन्दन कुमार सिंह (22 वर्ष): पिता- अशोक सिंह।

​गिरफ्तार किए गए अधिकांश युवक 22 से 41 वर्ष की आयु के हैं। पुलिस का कहना है कि इन लोगों ने भीड़ को भड़काने और पुलिस वाहन को क्षतिग्रस्त करने में मुख्य भूमिका निभाई थी। पुलिस की यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो सोचते हैं कि भीड़ का हिस्सा बनकर वे अपराध से बच जाएंगे।

वर्तमान स्थिति: भोगांव में ‘कमांडो’ गश्त और पुलिस का सख्त संदेश

​17 अप्रैल की दोपहर तक भोगांव में स्थिति अब पूरी तरह सामान्य बताई जा रही है। हालांकि, एहतियात के तौर पर कदवा थाने की पुलिस और जिला पुलिस बल की गश्त जारी है। पुलिस अधिकारी लगातार ग्रामीणों के साथ बैठक कर रहे हैं ताकि अफवाहों पर लगाम लगाई जा सके। घायलों का इलाज जारी है और उनकी स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।

​कटिहार पुलिस ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि कानून व्यवस्था भंग करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर रखी है ताकि इस घटना को लेकर कोई भ्रामक जानकारी न फैलाई जाए। “जन विश्वास संकल्प हमारा” के नारे के साथ कटिहार पुलिस ने यह साबित किया है कि वह अपराध और अराजकता दोनों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है।

अगली कार्रवाई: फरार अभियुक्तों की तलाश तेज

​पुलिस की कार्रवाई अभी रुकी नहीं है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, एफआईआर में दर्ज अन्य अभियुक्तों की पहचान कर ली गई है। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जांच में सहयोग करें और किसी भी संदेहास्पद व्यक्ति की सूचना तुरंत नजदीकी थाने को दें।

​भोगांव की इस घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या आपसी विवादों में सीधे हिंसा का सहारा लेना और फिर भीड़ द्वारा कानून हाथ में लेना समाज के लिए कितना घातक है। कटिहार पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद दिलाई है और उपद्रवियों के मन में खौफ पैदा किया है। पुलिस की मुस्तैदी के कारण ही महज 12 घंटे में 13 लोगों की सलाखों के पीछे वापसी संभव हो सकी है।

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