कटिहार के कटाकोष में बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर मिड-डे मील खाने लगे डीएम आशुतोष द्विवेदी, सादगी और जमीनी कार्यशैली की चर्चा तेज

कटिहार। प्रशासनिक अधिकारियों को अक्सर बैठकों, निरीक्षणों और सरकारी कार्यक्रमों के दौरान देखा जाता है, लेकिन जब कोई वरिष्ठ अधिकारी औपचारिकता से अलग हटकर आम लोगों के बीच सहज तरीके से समय बिताता है, तो वह तस्वीर लोगों के दिलों में खास जगह बना लेती है। कटिहार जिले में भी ऐसा ही एक दृश्य सामने आया, जहां जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने मनिहारी अनुमंडल के कटाकोष क्षेत्र के एक प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर मिड-डे मील का भोजन किया। इस दौरान उन्होंने न केवल भोजन की गुणवत्ता का निरीक्षण किया, बल्कि बच्चों से बातचीत कर विद्यालय की व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली। उनकी इस सादगी और सहज व्यवहार की तस्वीरें अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

मनिहारी अनुमंडल के कटाकोष क्षेत्र में विकास योजनाओं और सरकारी व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे जिलाधिकारी का कार्यक्रम सामान्य प्रशासनिक निरीक्षण का हिस्सा था। विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ विद्यालय पहुंचने पर उन्होंने सबसे पहले स्कूल की शैक्षणिक गतिविधियों, बच्चों की उपस्थिति, साफ-सफाई और उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उनकी नजर उस समय बच्चों पर पड़ी, जब वे निर्धारित समय पर मिड-डे मील का भोजन कर रहे थे।

बच्चों को भोजन करते देख जिलाधिकारी ने किसी औपचारिक व्यवस्था का इंतजार नहीं किया। उन्होंने वहीं बिछी टाट-पट्टी पर बच्चों के बीच बैठने का निर्णय लिया। कुछ ही क्षणों में जिले के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर भोजन करते दिखाई दिए। इस दृश्य ने विद्यालय परिसर में मौजूद शिक्षकों, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों को भी आश्चर्यचकित कर दिया।

बच्चों के साथ बैठकर जिलाधिकारी ने मिड-डे मील का स्वाद भी चखा। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता, स्वाद, पोषण स्तर और स्वच्छता से जुड़े विभिन्न पहलुओं का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने भोजन तैयार करने की प्रक्रिया, रसोईघर की स्थिति और खाद्यान्न भंडारण व्यवस्था की भी जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और विद्यालय प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिया कि बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता किसी भी परिस्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बच्चों से पढ़ाई, विद्यालय आने की नियमितता और मिलने वाली सुविधाओं के बारे में भी बातचीत की। उन्होंने बच्चों से यह भी पूछा कि भोजन समय पर मिलता है या नहीं, भोजन की गुणवत्ता कैसी रहती है और विद्यालय में किसी प्रकार की परेशानी तो नहीं होती। बच्चों ने भी खुलकर अपनी बातें साझा कीं, जिसे जिलाधिकारी ने गंभीरता से सुना।

विद्यालय के शिक्षकों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्तर पर शिक्षा और पोषण दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। यदि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलेगा तो उनका स्वास्थ्य बेहतर रहेगा और पढ़ाई में भी रुचि बढ़ेगी। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन से नियमित निगरानी बनाए रखने और सरकार की सभी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा।

मिड-डे मील योजना का उद्देश्य केवल बच्चों को भोजन उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि उन्हें पोषणयुक्त आहार देकर विद्यालय से जोड़कर रखना भी है। ऐसे में जिलाधिकारी का स्वयं भोजन चखना और बच्चों के साथ बैठकर उसकी गुणवत्ता जांचना प्रशासनिक जवाबदेही का एक सकारात्मक उदाहरण माना जा रहा है। इससे संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को भी योजनाओं के प्रभावी संचालन का संदेश मिला।

विद्यालय परिसर में मौजूद स्थानीय ग्रामीणों ने भी जिलाधिकारी के इस व्यवहार की सराहना की। लोगों का कहना था कि आमतौर पर बड़े अधिकारी निरीक्षण के दौरान औपचारिक बैठक कर वापस लौट जाते हैं, लेकिन बच्चों के साथ बैठकर भोजन करना उनकी संवेदनशीलता और सहज व्यक्तित्व को दर्शाता है। कई अभिभावकों ने इसे प्रशासन और आम जनता के बीच विश्वास बढ़ाने वाला कदम बताया।

दौरे के दौरान जिलाधिकारी ने विद्यालय परिसर की साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था, शौचालय, कक्षा-कक्षों की स्थिति और अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। जहां सुधार की आवश्यकता महसूस हुई, वहां संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

कटाकोष क्षेत्र के इस दौरे की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों ने जिलाधिकारी की कार्यशैली की सराहना की। अनेक लोगों ने इसे जमीनी प्रशासन की सकारात्मक तस्वीर बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास अधिकारियों और आम नागरिकों के बीच दूरी कम करते हैं। कई लोगों ने लिखा कि यदि अधिकारी नियमित रूप से इसी तरह विद्यालयों और सरकारी संस्थानों का निरीक्षण करें तो योजनाओं के क्रियान्वयन में और अधिक पारदर्शिता आएगी।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि जब वरिष्ठ अधिकारी स्वयं योजनाओं की जमीनी स्तर पर समीक्षा करते हैं, तो संबंधित विभागों में जवाबदेही बढ़ती है। विशेष रूप से शिक्षा और पोषण जैसी योजनाओं में इस प्रकार के निरीक्षण से व्यवस्था में सुधार की संभावना अधिक रहती है।

मनिहारी के कटाकोष स्थित विद्यालय में बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर भोजन करने का यह दृश्य केवल एक तस्वीर भर नहीं रहा, बल्कि प्रशासन और समाज के बीच संवाद, विश्वास और संवेदनशीलता का संदेश भी बन गया। जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी का यह कदम इस बात का उदाहरण है कि प्रभावी प्रशासन केवल आदेशों से नहीं, बल्कि लोगों के बीच जाकर उनकी परिस्थितियों को समझने और उनके साथ जुड़ने से मजबूत होता है। यही कारण है कि उनका यह दौरा पूरे कटिहार जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे प्रशासनिक सादगी तथा जनसरोकार का सकारात्मक उदाहरण मान रहे हैं।

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