6 साल संघर्ष के बाद IAS अधिकारी बनीं कनिका, गृह मंत्रालय की नौकरी छोड़ की UPSC की तैयारी; पढ़े सफलता की कहानी

आईएएस-आईपीएस बनने के लिए यूपीसएसी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी लाखों युवा कर रहे हैं. कुछ यूपीएससी एस्पिरेंट्स को जल्दी कामयाबी मिल जाती है. जबकि कुछ लोगों को लंबा संघर्ष करना पड़ता है. हरियाणा के बहादुरगढ़ की रहने वाली आईएएस कनिका राठी दूसरी तरह की हैं. उन्होंने आईएएस बनने के लिए 6 साल लंबा संघर्ष किया. उन्होंने अंतत: साल 2022 में कामयाबी हासिल करके ही दम लिया. आइए जानते हैं आईएएस कनिका की सक्सेस स्टोरी..

आईएएस बनना हरियाणा के बहादुरगढ़ की रहने वाली कनिका राठी का बचपन का सपना था. यूपीएससी की तैयारी के लिए उन्होंने सरकारी नौकरी तक छोड़ दी. उन्होंने यूपीएसी सिविन सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 64वीं रैंक हासिल किया था. कनिका ने आईएएस बनकर दिल्ली में अंग्रेजी के पीजीटी रहे अपने दादा स्व. दलजीत सिंह राठी का भी सपना पूरा किया.

कनिका राठी स्कूल के दिनों से ही काफी मेधावी रही हैं. उन्होंने बहादुरगढ़ के बाल भारती स्कूल से 12वीं कक्षा पास करने के बाद दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज से गणित के साथ बीएससी की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा उन्होंने अशोका यूनिवर्सिटी से लिबरल स्टडीज में पीजी भी किया है. उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी साल 2015 में शुरू की थी. इसके लिए उन्होंने दिल्ली में यूपीएससी की कोचिंग भी की.

कनिका राठी ने साल 2016 और 2017 में लगातार यूपीएससी की परीक्षाएं दी. लेकिन दोनों में असफलता ही हाथ लगी. साल 2019 में उन्हें गृह मंत्रालय में नौकरी मिल गई. उन्होंने कुछ समय तक आईबी के पटना स्थित ऑफिस में काम करने के बाद माता-पिता की सहमति से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद उन्होंने खुद को दोबारा यूपीएससी की तैयारी में झोंक दिया.

कनिका राठी को यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता चौथे प्रयास में मिली. ऑल इंडिया 64वीं रैंक हासिल करके कनिका आईएएस अफसर बन गईं. इस तरह उन्हें आईएएस अफसर बनना का अपना सपना पूरा करने में छह साल लंबा वक्त और खूब सारी मेहनत लगी.
आईएएस कनिका राठी के फैमिली बैकग्राउंड की बात करें तो माता-पिता से लेकर चाचा तक सरकारी विभागों में अच्छे पदों पर हैं. उनके पिता नरेश इंजीनियर और चाचा डॉ. अनिल राठी झज्जर चिकित्सा विभाग में सीनियर डॉक्टर हैं. वहीं, उनकी मां नीलम दिल्ली के घेवरा स्थित सर छोटूराम पब्लिक स्कूल में टीचर हैं.
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