
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार एक ऐसा चेहरा उभरकर सामने आया है, जिसकी कहानी संघर्ष, मेहनत और हौसले की मिसाल बन गई है। दूसरों के घरों में दाई और चौका-बर्तन का काम करने वाली कलिता मांझी अब विधायक बन गई हैं। उन्होंने Ausgram विधानसभा सीट से जीत हासिल कर सबको चौंका दिया है।
घर-घर काम करने वाली महिला बनीं माननीय
Bharatiya Janata Party ने औसग्राम सीट से कलिता मांझी को उम्मीदवार बनाकर सभी को हैरान कर दिया था। एक सामान्य परिवार से आने वाली और घर-घर काम करने वाली महिला को टिकट देना उस समय चर्चा का विषय बन गया था।
अब उनकी जीत के बाद बीजेपी इस फैसले को बड़ी राजनीतिक सफलता के रूप में देख रही है।
2500 रुपये महीने में करती थीं काम
कल तक जिन हाथों में झाड़ू-पोछा और बर्तन साफ करने का काम था, आज उन्हीं हाथों में जनता ने नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंप दी है।
बताया जाता है कि कलिता मांझी महज 2500 रुपये महीने की आय पर चार घरों में काम करती थीं। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने संघर्ष जारी रखा और राजनीति में अपनी पहचान बनाई।
All India Trinamool Congress उम्मीदवार को दी बड़ी शिकस्त
कलिता मांझी का मुकाबला टीएमसी उम्मीदवार Prasanna Lohar से था। उन्होंने 12,535 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की।
इस जीत ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी और टीएमसी के लिए भी यह बड़ा झटका माना जा रहा है।
बीजेपी की बड़ी जीत
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 207 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि Mamata Banerjee की पार्टी टीएमसी को 80 सीटों पर संतोष करना पड़ा।
औसग्राम सीट पर कलिता मांझी की जीत को बीजेपी की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
बर्धमान के छोटे से घर से विधानसभा तक का सफर
कलिता मांझी Bardhaman जिले के गुसकुरा माछपुर पारा इलाके की रहने वाली हैं। वह एक छोटे से घर में अपने पति, मां और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ रहती थीं।
दूसरों के घरों में काम करके परिवार चलाने वाली कलिता ने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वह विधायक बन जाएंगी।
2021 में मिली थी हार
कलिता मांझी ने बताया कि वह 2014 में बीजेपी की बूथ एजेंट बनी थीं। बाद में उन्हें संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां मिलीं।
बीजेपी ने 2021 में पहली बार उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका दिया था, लेकिन उस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
2026 में मिली बड़ी सफलता
2022 में उन्हें पार्टी सचिव और 2025 में बोलपुर जिले का महासचिव बनाया गया। इसके बाद बीजेपी ने 2026 में फिर से उन पर भरोसा जताया और इस बार उन्होंने जीत हासिल कर इतिहास रच दिया।
कलिता ने बताया कि दूसरी बार टिकट मिलने के बाद भी उन्होंने कुछ दिनों तक घरों में काम किया, लेकिन चुनाव प्रचार के लिए बाद में काम छोड़ना पड़ा।
संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी
कलिता मांझी की कहानी आज उन लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। उनकी जीत को आम लोगों और मेहनतकश वर्ग की जीत के तौर पर भी देखा जा रहा है।


