
भागलपुर | 14 मार्च, 2026 : बिहार की ‘सिल्क सिटी’ आज इंसाफ की गवाह बनी। भागलपुर व्यवहार न्यायालय के प्रांगण में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने आज हजारों चेहरों पर मुस्कान लौटा दी। “तारीख पर तारीख” के अंतहीन सिलसिले को खत्म करने के लिए न्यायपालिका और प्रशासन ने हाथ मिलाया, जिसका असर कोर्ट परिसर में उमड़ी भारी भीड़ के रूप में देखने को मिला।
न्याय की चौपाल: दीप प्रज्वलन के साथ हुआ महाकुंभ का आगाज
शनिवार की सुबह भागलपुर कचहरी परिसर एक अलग ही ऊर्जा से लबरेज था। कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन मुख्य अतिथियों द्वारा सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस मौके पर न्याय और प्रशासन का एक साथ मंच पर आना जनता के लिए भरोसे का प्रतीक बना।
मंच पर मौजूद प्रमुख दिग्गज:
- श्री राजकुमार राजपूत: प्रधान न्यायाधीश, व्यवहार न्यायालय भागलपुर।
- डॉ. नवल किशोर चौधरी: जिलाधिकारी (DM), भागलपुर।
- श्री प्रमोद कुमार यादव: वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP), भागलपुर।
- श्री मिलन कुमार: अपर जिला सत्र न्यायाधीश-1 (ADJ-1)।
- श्री वीरेंद्र कुमार मिश्रा: अध्यक्ष, स्थाई लोक अदालत।
- श्री अंजनी कुमार दुबे: सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA)।
- श्री धर्मेंद्र कुमार पांडे: सब जज-1।
DM का कड़ा संदेश: “अदालतों से बोझ घटाएं, जनता को राहत दिलाएं”
मीडिया से मुखातिब होते हुए जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने इस आयोजन को न्यायपालिका के लिए ‘संजीवनी’ बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोक अदालत केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आम आदमी को राहत देने का सबसे सशक्त माध्यम है।
”हजारों की संख्या में लोगों का यहाँ पहुंचना यह साबित करता है कि जनता सुलह की पक्षधर है। मैंने सभी संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि शमनीय (Compoundable) वादों का निपटारा प्राथमिकता पर करें। अगर ये छोटे मामले यहीं सुलझ जाते हैं, तो न्यायपालिका का कीमती समय बचेगा और वे संगीन अपराधों पर तेजी से सुनवाई कर सकेंगे।”
— डॉ. नवल किशोर चौधरी (DM, भागलपुर)
क्यों खास रही आज की लोक अदालत?
आज के इस आयोजन में कई ऐसे विवादों का निपटारा ऑन-द-स्पॉट किया गया जो सालों से लंबित थे। अधिकारियों और न्यायाधीशों के बीच समन्वय का नतीजा रहा कि:
- आपसी सुलह: मुकदमों के बोझ से दबे लोगों को बिना किसी कड़वाहट के घर जाने का मौका मिला।
- न्यायपालिका को रफ्तार: छोटे मामलों के हटने से अब गंभीर मुकदमों की सुनवाई में तेजी आएगी।
- अधिकारियों की सक्रियता: प्रशासन और पुलिस ने मिलकर बैंक लोन, बिजली बिल और पारिवारिक विवादों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई।
VOB का नजरिया: कागजों की जंग अब दोस्ती के संग!
भागलपुर लोक अदालत की यह सफलता बताती है कि अगर प्रशासन और न्यायपालिका दृढ़ संकल्पित हों, तो न्याय केवल अमीरों की जागीर नहीं रह जाता। जिलाधिकारी और एसएसपी का खुद मैदान में उतरना वादियों के मनोबल को बढ़ाता है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इसे एक बड़ी उपलब्धि मानता है क्योंकि जहाँ विवाद खत्म होते हैं, वहीं से विकास शुरू होता है।


