दरभंगा। बिहार के बहुचर्चित पटोरी हत्याकांड में आखिरकार 31 साल बाद अदालत का बड़ा फैसला आया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (तृतीय) सुमन कुमार दिवाकर की अदालत ने दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं समेत पांच दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास और 10-10 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने बताया कि अदालत ने विशनपुर थाना क्षेत्र के बसंत गांव निवासी
कौशर इमाम हासमी (वरिष्ठ अधिवक्ता व पूर्व लोक अभियोजक), अंबर इमाम हासमी (वरिष्ठ अधिवक्ता), राजा हासमी, मोबिन हासमी और अंजार हासमी को दोषी करार दिया है।
अदालत ने सभी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 307, 149 और 27 आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाया।
- धारा 302 (हत्या) में सश्रम आजीवन कारावास और 5 लाख रुपये जुर्माना
- धारा 307 (हत्या के प्रयास) में 10 वर्ष का कारावास और 5 लाख रुपये जुर्माना
इस तरह कुल जुर्माना 10 लाख रुपये प्रति दोषी तय किया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
घायलों और पीड़ित परिवार को मिलेगा मुआवजा
अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार को निर्देश दिया है कि घायलों और मृतक के आश्रितों को उचित मुआवजा तय कर शीघ्र भुगतान कराया जाए।
क्या है पूरा मामला?
लोक अभियोजक के अनुसार, 8 अगस्त 1994 की शाम पटोरी गांव के राम कृपाल चौधरी, रामपुकार चौधरी समेत 12 से अधिक किसान भैंस चराकर लौट रहे थे। वे गुणसार पोखर पर भैंसों को पानी पिला रहे थे, तभी बसंत गांव के 25 से अधिक लोग हथियारों के साथ पहुंचे और मवेशियों को जबरन अपने गांव ले जाने लगे।
किसानों ने विरोध किया तो आरोपियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस गोलीबारी में राम कृपाल चौधरी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
इसी जघन्य वारदात को लेकर चल रहे मुकदमे में 31 साल बाद अदालत ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
यह फैसला न सिर्फ पीड़ित परिवार के लिए राहत है, बल्कि न्याय व्यवस्था में भरोसे को भी मजबूत करता है।


