गया, बिहार: केंद्रीय मंत्री और गया से सांसद जीतन राम मांझी ने एक बार फिर बिहार में शराबबंदी कानून पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में शराबबंदी पूरी तरह से लागू नहीं हो पा रही है और शराब की होम डिलीवरी भी हो रही है।
मांझी का आरोप: शराबबंदी से आर्थिक नुकसान
मीडिया से बातचीत में मांझी ने कहा कि शराबबंदी से बिहार सरकार को भारी आर्थिक क्षति हो रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस पर गंभीर विचार करने की मांग की। उनका कहना था कि शराब बाहर से बिहार में पहुंच रही है, जिससे जनता का पैसा राज्य के बाहर जा रहा है।
गरीबों को ज्यादा हो रही है परेशानी
मांझी ने बताया कि शराबबंदी के कारण गरीब तबके के लोग अवैध शराब बनाने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि कई बार शराब जहरीली बन जाती है, जिससे गरीब लोगों की जान खतरे में पड़ती है। मांझी ने उदाहरण देते हुए कहा कि शराब में नौसादर, यूरिया और गाय को दी जाने वाली दवाइयां मिलाकर विषैली शराब बनाई जाती है, जिसे गरीब तबके के लोग पीकर प्रभावित होते हैं।
अमीर और गरीब में फर्क
मांझी ने कहा कि बड़े लोग आसानी से महंगी शराब पी सकते हैं, जबकि मेहनतकश गरीब लोग जहरीली शराब पीकर अपनी जान जोखिम में डालते हैं। उनका कहना था कि इस समस्या का असर एससी समुदाय, खासकर भुईयां-मुसहर जातियों पर अधिक पड़ रहा है।
शराबबंदी की समीक्षा जरूरी
उन्होंने यह भी बताया कि उनके सहयोगी विषु मांझी पांच साल पहले जहरीली शराब पीने से अपनी जान गंवा चुके हैं। मांझी ने कहा कि शराबबंदी कानून के तहत अधिकतर केस एससी समुदाय के खिलाफ दर्ज किए जा रहे हैं, इसलिए राज्य में शराबबंदी कानून की समीक्षा होना जरूरी है।


