पटना, 21 अगस्त।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार की ग्रामीण विकास विभाग की महत्वाकांक्षी योजना ‘जीविका’ अब केवल महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण की योजना नहीं रह गई है, बल्कि सामाजिक बदलाव की सशक्त ताकत बन चुकी है।
गांव-गांव में सक्रिय 60,000 से अधिक ग्राम संगठन नशामुक्ति और बाल विवाह रोकथाम के लिए जागरूक अभियान चला रहे हैं। महिलाओं की अगुवाई में आयोजित रैलियां, नुक्कड़ नाटक और चौपाल बैठकें ग्रामीण समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। शराबबंदी नियमों के अनुपालन में भी जीविका दीदियों की भूमिका निर्णायक साबित हो रही है।
सामाजिक सुधार के साथ-साथ पर्यावरण और आजीविका में योगदान
- 987 पौधशालाएं जीविका दीदियों द्वारा तैयार की गई हैं।
- अब तक 4.25 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं।
- मुख्यमंत्री कोशी मलवरी परियोजना के तहत 4,500 दीदियों को मलबरी की खेती और रेशम कीट पालन से जोड़ा गया।
- सोलर लैंप निर्माण के माध्यम से 372 महिलाएं अपने उद्यम चला रही हैं, जिसमें गया जिले की J-WIRES कंपनी सक्रिय भूमिका निभा रही है।
शिक्षा और कैरियर में भी सशक्त योगदान
- 33 जिलों के 110 प्रखंडों में सामुदायिक पुस्तकालय सह कैरियर विकास केंद्र स्थापित किए गए हैं।
- इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण बच्चों को पढ़ाई में सहयोग और करियर मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है।
जीविका दीदियों की यह पहल न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि समाज को नशामुक्त, जागरूक और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने में भी अहम भूमिका निभा रही है।


