
भागलपुर में विक्रमशिला पुल ध्वस्त होने के बाद गंगा पार आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। पुल पर आवाजाही बंद होने के कारण अब हजारों लोगों की निर्भरता नावों पर बढ़ गई है। हर दिन बड़ी संख्या में यात्री बरारी घाट समेत विभिन्न गंगा घाटों से नाव के जरिए सफर करने को मजबूर हैं। ऐसे में नावों पर बढ़ती भीड़ और ओवरलोडिंग की आशंका को देखते हुए सामाजिक संस्था जीवन जागृति सोसायटी ने लोगों के बीच जागरूकता अभियान शुरू किया है।
शनिवार को बरारी पुल घाट पर संस्था की ओर से राहत एवं जागरूकता शिविर लगाया गया, जहां यात्रियों और नाव चालकों को सुरक्षा संबंधी जरूरी जानकारी दी गई। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार सिंह के नेतृत्व में यह अभियान चलाया गया। इस दौरान यात्रियों के बीच सुरक्षा संदेश वाले पंपलेट बांटे गए और घाट के आसपास चेतावनी एवं जागरूकता से जुड़े बैनर लगाए गए।
विक्रमशिला पुल संकट के बाद बढ़ी चिंता
विक्रमशिला पुल को लेकर पैदा हुए संकट के बाद भागलपुर और आसपास के इलाकों में आवागमन की समस्या गंभीर हो गई है। पुल से रोजाना हजारों लोग गंगा पार करते थे, लेकिन अब नावें ही एकमात्र सहारा बन गई हैं। सुबह से लेकर देर शाम तक घाटों पर लोगों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जल्दबाजी और अधिक यात्रियों को बैठाने की होड़ में कई नावें क्षमता से अधिक लोगों को लेकर चल रही हैं। ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
इसी खतरे को देखते हुए जीवन जागृति सोसायटी ने लोगों को सतर्क करने और सुरक्षित यात्रा के लिए प्रेरित करने का निर्णय लिया।
बरारी घाट पर लगाया गया राहत शिविर
बरारी गंगा घाट पर लगाए गए शिविर में यात्रियों के लिए पेयजल की व्यवस्था की गई। गर्मी और भीड़ के बीच घाट से गुजरने वाले लोगों को राहत पहुंचाने के लिए संस्था के सदस्य लगातार सक्रिय नजर आए।
शिविर में मौजूद स्वयंसेवकों ने यात्रियों को समझाया कि नाव पर चढ़ते समय जल्दबाजी न करें और नाव की क्षमता से अधिक भीड़ होने पर यात्रा से बचें। संस्था के सदस्यों ने यह भी कहा कि कुछ मिनट की देरी जान बचा सकती है।
घाट पर लगाए गए बैनरों और पंपलेटों में साफ संदेश लिखा गया था—
“आप खुद अपना रक्षक बनें, नाव को ओवरलोड होने से बचाएं। आपका जीवन आपके परिवार के लिए अमूल्य है।”
यह संदेश लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा और कई यात्रियों ने इसे समय की जरूरत बताया।
डॉ. अजय सिंह ने लोगों से की अपील
जीवन जागृति सोसायटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार सिंह खुद घाट पर मौजूद रहे। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि एक बड़ी आपदा से लोग पहले ही गुजर चुके हैं, इसलिए अब दूसरी दुर्घटना को रोकना सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन की ओर से सुरक्षा को लेकर जो दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, उनका पालन करना हर नागरिक का कर्तव्य है। यदि लोग स्वयं जागरूक रहेंगे तो किसी भी बड़े हादसे को टाला जा सकता है।
डॉ. अजय सिंह ने कहा कि नाव पर क्षमता से अधिक लोगों का बैठना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। गंगा में तेज धारा और अधिक भार किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
नाव चालकों को भी दी गई समझाइश
अभियान के दौरान संस्था के सदस्यों ने नाव चालकों से भी बातचीत की। उन्हें समझाया गया कि कुछ अतिरिक्त यात्रियों के लालच में लोगों की जान जोखिम में डालना ठीक नहीं है।
संस्था ने नाव चालकों से कहा कि वे नियमों का पालन करें और नाव की निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को न बैठाएं। साथ ही लाइफ जैकेट, रस्सी और अन्य सुरक्षा इंतजाम रखने की भी सलाह दी गई।
कई नाव चालकों ने भी माना कि भीड़ बढ़ने के कारण दबाव ज्यादा है, लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
यात्रियों ने की पहल की सराहना
बरारी घाट पर मौजूद यात्रियों ने जीवन जागृति सोसायटी की इस पहल की खुलकर सराहना की। लोगों ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में इस तरह के जागरूकता अभियान की बेहद जरूरत है।
एक यात्री ने कहा कि पुल संकट के बाद हर दिन हजारों लोग नाव से सफर कर रहे हैं। ऐसे में यदि लोग सतर्क नहीं रहे तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने कहा कि संस्था ने सही समय पर लोगों को जागरूक करने का काम किया है।
महिलाओं और बुजुर्ग यात्रियों ने भी कहा कि घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था और जागरूकता दोनों जरूरी हैं।
सामाजिक जिम्मेदारी निभा रही संस्था
जीवन जागृति सोसायटी लंबे समय से सामाजिक जागरूकता और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सक्रिय रही है। संस्था समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर, रक्तदान अभियान, आपदा राहत कार्य और जनजागरूकता कार्यक्रम चलाती रही है।
विक्रमशिला पुल संकट के बाद संस्था ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए घाटों पर अभियान शुरू किया। संस्था का कहना है कि प्रशासन के साथ-साथ सामाजिक संगठनों और आम लोगों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे लोगों को सुरक्षित रहने के लिए प्रेरित करें।
प्रशासन से भी बढ़ी उम्मीदें
घाटों पर बढ़ती भीड़ के बीच अब लोगों की नजर प्रशासनिक व्यवस्था पर भी टिकी हुई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नाव संचालन पर निगरानी और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।
कई लोगों ने घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल, गोताखोर टीम और आपातकालीन सहायता व्यवस्था बढ़ाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
विक्रमशिला पुल संकट बना बड़ी चुनौती
विक्रमशिला पुल से जुड़ी समस्या केवल भागलपुर ही नहीं बल्कि पूरे कोसी-सीमांचल क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा के कामकाज पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है।
लोगों का कहना है कि जब तक स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक घाटों पर सुरक्षा और प्रबंधन सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
जीवन जागृति सोसायटी ने अंत में सभी यात्रियों से सतर्क रहने और नियमों का पालन करने की अपील की। संस्था का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही कई परिवारों को संकट में डाल सकती है।
डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा कि जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। यदि लोग खुद सतर्क रहेंगे और नियमों का पालन करेंगे तो किसी भी संभावित दुर्घटना को रोका जा सकता है।
बरारी घाट पर चलाया गया यह अभियान अब पूरे भागलपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे सामाजिक जिम्मेदारी का सकारात्मक उदाहरण मान रहे हैं।


