जेडीयू ने मधेपुरा की चारों सीटों पर उम्मीदवार उतारे — अनुभव, जातीय संतुलन और महिला सशक्तिकरण पर बड़ा दांव

पटना/मधेपुरा: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग से ठीक 18 दिन पहले, जनता दल (यूनाइटेड) ने मधेपुरा जिले की चारों विधानसभा सीटों — मधेपुरा, सिंहेश्वर (सुरक्षित), आलमनगर और बिहारीगंज — पर अपने प्रत्याशियों के नामांकन दाखिल कर दिए हैं।

स्क्रुटिनी के बाद सभी नामांकन वैध पाए गए हैं।
इस बार जेडीयू ने उम्मीदवारों के चयन में अनुभव, सामाजिक समीकरण और संगठनात्मक मजबूती को प्राथमिकता दी है।
चारों सीटों पर अब NDA (JDU) और महागठबंधन (RJD) के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है।


मधेपुरा सीट: महिला सशक्तिकरण और सामाजिक संतुलन पर दांव

मधेपुरा विधानसभा सीट से JDU ने कविता कुमारी साहा को उम्मीदवार बनाया है। कविता साहा तेली समाज से आती हैं और वर्तमान में मधेपुरा नगर परिषद की मुख्य पार्षद हैं।
एक साल पहले ही उन्होंने जेडीयू की सदस्यता ली थी।

पार्टी ने उन्हें महिला सशक्तिकरण और पिछड़े वर्ग के समीकरण को मजबूत करने के उद्देश्य से टिकट दिया है। इसे जातीय राजनीति से आगे बढ़कर “सोशल बैलेंसिंग” की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

RJD प्रत्याशी: वर्तमान विधायक चंद्रशेखर यादव, जिन्होंने 2020 में जेडीयू के निखिल मंडल को 16,046 वोटों से हराया था। यादव-मुस्लिम समीकरण पर टिकी RJD को जेडीयू के नए चेहरे से चुनौती मिल सकती है।


सिंहेश्वर (सुरक्षित): अनुभवी मुसहर नेता की वापसी

सिंहेश्वर विधानसभा सीट से जेडीयू ने पूर्व मंत्री डॉ. रमेश ऋषिदेव को दोबारा मैदान में उतारा है। वे मुसहर समुदाय से हैं और दर्शनशास्त्र में पीएचडी धारक हैं। 2005 से 2020 तक लगातार विधायक रहने के साथ दो बार मंत्री भी रहे।

RJD प्रत्याशी: वर्तमान विधायक चंद्रहास चौपाल, जिन्होंने 2020 में डॉ. ऋषिदेव को 5,573 वोटों से हराया था। यह सीट दलित वोटों के विभाजन और विकास के मुद्दों पर बेहद अहम मानी जा रही है।


आलमनगर सीट: दिग्गज नरेंद्र नारायण यादव फिर मैदान में

आलमनगर से जेडीयू ने एक बार फिर नरेंद्र नारायण यादव पर भरोसा जताया है। वे 1995 से लगातार विधायक हैं और कभी चुनाव नहीं हारे। वर्तमान में बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष हैं और यादव समुदाय के इस नेता की छवि सर्वस्वीकार्य मानी जाती है।

RJD प्रत्याशी: रामानंद मंडल, जो पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रहे हैं। यह सीट फिर एक बार NDA बनाम महागठबंधन की क्लासिक टक्कर बनेगी।


बिहारीगंज सीट: स्थानीय विधायक पर दोबारा भरोसा

बिहारीगंज विधानसभा सीट से जेडीयू ने मौजूदा विधायक निरंजन मेहता को फिर से मैदान में उतारा है।
वे कोइरी समाज से हैं और लगातार दो बार से विधायक हैं।
पार्टी ने स्थानीय पकड़ और जातीय संतुलन को देखते हुए उन्हें दोबारा मौका दिया है।

RJD प्रत्याशी: विजय मंडल, जो पिछड़े वर्ग के समर्थन पर निर्भर हैं। 2020 में हार के बावजूद RJD इस बार वोट-विभाजन की रणनीति पर काम कर रही है।


मधेपुरा की राजनीतिक पृष्ठभूमि

मधेपुरा लालू प्रसाद यादव की कर्मभूमि रही है, जहां RJD का यादव-मुस्लिम गठजोड़ पारंपरिक रूप से मजबूत रहा है।
2020 के चुनाव में —

  • RJD ने मधेपुरा और सिंहेश्वर सीटें जीतीं।
  • JDU ने आलमनगर और बिहारीगंज पर कब्जा बरकरार रखा।

इस बार पहले चरण की वोटिंग 6 नवंबर को 121 सीटों पर होगी, जिनमें मधेपुरा जिला शामिल है।
कुल 243 सीटों में NDA और महागठबंधन की 101-101 सीटों पर सीधी टक्कर मानी जा रही है।


राजनीतिक समीकरण (संक्षेप में):

विधानसभा सीटजेडीयू प्रत्याशीआरजेडी प्रत्याशीमुख्य समीकरण
मधेपुराकविता कुमारी साहाचंद्रशेखर यादवमहिला सशक्तिकरण बनाम यादव-मुस्लिम समीकरण
सिंहेश्वर (सुरक्षित)डॉ. रमेश ऋषिदेवचंद्रहास चौपालदलित मतदाता और अनुभव बनाम युवा नेतृत्व
आलमनगरनरेंद्र नारायण यादवरामानंद मंडलयादव बनाम पिछड़ा वर्ग संतुलन
बिहारीगंजनिरंजन मेहताविजय मंडलकोइरी वोट बैंक बनाम पिछड़ा समीकरण

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