पटना में जलभृत विकास पर कार्यशाला, विशेषज्ञों ने बताए समाधान
पटना। पानी प्रकृति का सबसे बहुमूल्य उपहार है, लेकिन देश और बिहार के कई हिस्सों में जल संकट गहराता जा रहा है। ऐसे में जरूरी है कि जितना पानी निकाला जाए, उतना ही भूगर्भ जलस्तर को रिचार्ज भी किया जाए। यह बात लघु जल संसाधन विभाग के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने शुक्रवार को पटना के तारामंडल सभागार में आयोजित एक दिवसीय “जलभृत का विकास” विषयक कार्यशाला में कही।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भविष्य के जल संकट को लेकर पहले से सचेत है। इसी कारण वर्ष 2019-20 में जल-जीवन-हरियाली अभियान शुरू किया गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसके महत्व को देखते हुए अगले पांच वर्षों के लिए इसकी रणनीति तय की है। मंत्री ने बताया कि सूखाग्रस्त जिलों में लघु जल संसाधन विभाग युद्धस्तर पर काम कर रहा है और बिहार में भूगर्भ जल रिचार्ज की पहल आने वाले समय में देश के लिए उदाहरण बनेगी।
कृषि में जल की बचत पर जोर
लघु जल संसाधन विभाग के सचिव बी. कार्तिकेय धनजी ने कहा कि बिहार कृषि प्रधान राज्य है और सिंचाई में भूगर्भ जल की बड़ी भूमिका है। इसलिए कम पानी वाली तकनीक और फसलों को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने दरभंगा सहित अन्य जिलों में लिफ्ट इरिगेशन की सफलता का भी जिक्र किया।
वैश्विक भूजल दोहन में भारत आगे
अभियंता प्रमुख सुनील कुमार ने पीपीटी के माध्यम से राज्य में भूगर्भ जलस्तर की स्थिति और रिचार्ज परियोजनाओं की जानकारी दी। सेंट्रल वॉटर बोर्ड के पूर्व सदस्य डॉ. दीपांकर साहा ने बताया कि वैश्विक भूजल निष्कर्षण में भारत, चीन और अमेरिका से भी आगे है। उन्होंने कहा कि दोहन के अनुपात में रिचार्ज नहीं होने से कई राज्य क्रिटिकल श्रेणी में पहुंच चुके हैं।
डॉ. साहा ने खेती में अनियंत्रित जल उपयोग को भूजल स्तर गिरने की बड़ी वजह बताया और ठोस कदम उठाने पर जोर दिया।
विशेषज्ञों ने रखे विचार
कार्यशाला में एक्विफर पहचान, भूजल आकलन, कृत्रिम रिचार्ज तकनीक, जल संरक्षण, डेटा आधारित योजना और सतत भूजल प्रबंधन जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इसमें सेंट्रल वाटर बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक राजीव रंजन शुक्ला, अपर सचिव संगीता कुमारी, एनआईटी पटना, पटना यूनिवर्सिटी और आईआईटी पटना के विशेषज्ञ, शोधार्थी और अधिकारी मौजूद रहे।


