भागलपुर : जमीन विवाद में पक्षपात करने पर ईशीपुर बाराहाट थानेदार सस्पेंड, कहलगांव डीएसपी पर भी जांच

भागलपुर। जमीन विवाद के एक मामले में गंभीर लापरवाही और पक्षपात सामने आया है। ईशीपुर बाराहाट थानेदार चंदन कुमार को मामले में एक पक्ष से मिलकर गलत रिपोर्ट देने के आरोप में आईजी विवेक कुमार ने तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। वहीं कहलगांव डीएसपी-2 अर्जुन गुप्ता पर वरीय अधिकारियों को गलत जानकारी देकर दिग्भ्रमित करने का आरोप लगाया गया है।

आईजी ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी लॉ एंड ऑर्डर को चार बिंदुओं पर जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

मामला क्या है?

जानकारी के अनुसार, ईशीपुर बाराहाट थाना क्षेत्र के रहने वाले दो भाई—दिलीप कुमार सिन्हा और किशोर सिन्हा ने संयुक्त रूप से 13.5-13.5 डिसमिल जमीन खरीदी थी। बाद में दिलीप की मौत हो गई। इसके बाद उनकी पत्नी मीना पटेल ने गलत तरीके से चौहद्दी तैयार कर पूरी 13.5 डिसमिल जमीन अपने बेटे को दानपत्र के माध्यम से रजिस्ट्री करा दी।

आरोप है कि उन्होंने अपने हिस्से के अलावा किशोर सिन्हा के हिस्से की, सड़क से सटी हुई जमीन भी अपने बेटे के नाम कर दी, जबकि उस पर उनका कोई अधिकार नहीं था। इतना ही नहीं, इस दानपत्र के लिए कथित रूप से फर्जी नजरी नक्शा भी तैयार कराया गया।

शिकायत पर कार्रवाई नहीं

किशोर सिन्हा की पत्नी सुनीता सिन्हा ने इस मामले में थाना और वरीय अधिकारी से शिकायत की थी। लेकिन न तो थाना स्तर पर और न ही डीएसपी स्तर पर उनकी शिकायत को गंभीरता से लिया गया। उल्टा, थानेदार और डीएसपी ने मीना पटेल के पक्ष में रिपोर्ट दे दी।

जांच के मुख्य बिंदु

आईजी ने जांच के लिए चार बिंदु तय किए हैं:

  • दानपत्र के बाद भी स्थानीय अंचलाधिकारी ने दाखिल-खारिज क्यों नहीं किया?
  • क्या दानपत्र में वर्णित 13.5 डिसमिल जमीन की रसीद मीना पटेल के नाम से कट रही थी?
  • कहलगांव अवर निबंधक कार्यालय से उक्त नजरी नक्शा किस परिस्थिति में तैयार हुआ?
  • मीना पटेल के पास नक्शे में अंकित जमीन पर मालिकाना हक से संबंधित कोई अभिलेख है या नहीं?

आरोप: पक्षपात और लापरवाही

सुनीता सिन्हा ने आरोप लगाया है कि थानेदार और डीएसपी ने बिना दस्तावेज देखे रिपोर्ट दे दी और लिखा कि मीना पटेल को अपने बेटे के नाम जमीन रजिस्ट्री करने का अधिकार है। इसके अलावा, उन्होंने वरीय अधिकारी को यह भी बताया कि यह मामला सिविल का है और सुनीता को सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए।

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