लोगों से दूर होते नीतीश कुमार? जनता दरबार से कार्यकर्ताओं तक संवाद पर सवाल

पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लंबे समय तक जनता से सीधे संवाद करने वाले नेता के रूप में पहचाने जाते रहे हैं। वर्ष 2005 में सत्ता संभालने से पहले और बाद तक उन्होंने न्याय यात्रा, विकास यात्रा, जनता दरबार और पार्टी कार्यालय में मुलाकातों के जरिए आम लोगों और कार्यकर्ताओं से निरंतर संपर्क बनाए रखा। लेकिन हाल के वर्षों में मुख्यमंत्री की यह छवि बदलती नजर आ रही है।

जनता दरबार और सीधा संवाद बंद

सत्ता में आने के बाद नीतीश कुमार ने जनता से मिले फीडबैक के आधार पर साइकिल योजना, पोशाक योजना, शराबबंदी जैसे कई बड़े फैसले लिए। जनता दरबार के माध्यम से वे आम लोगों की समस्याएं सुनते और कई मामलों में मौके पर ही समाधान करते थे। हालांकि, अब जनता दरबार पूरी तरह बंद है और मुख्यमंत्री का आम लोगों से सीधा संवाद लगभग समाप्त हो गया है।

कार्यकर्ताओं से भी बढ़ी दूरी

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पहले मुख्यमंत्री नियमित रूप से जदयू कार्यालय में कार्यकर्ताओं और नेताओं से मिलते थे। हर साल 1 जनवरी को आम लोगों से मिलने की परंपरा भी रही है, लेकिन इस बार केवल चुनिंदा लोगों से ही मुलाकात हुई। अब मुख्यमंत्री कार्यक्रमों में सक्रिय तो दिखते हैं, लेकिन कड़े सुरक्षा घेरे के कारण आम लोग और कार्यकर्ता उनके पास नहीं पहुंच पा रहे हैं।

जदयू की सफाई

इस मुद्दे पर विपक्ष के हमलों के बीच मुख्यमंत्री के करीबी और जदयू विधान पार्षद संजय गांधी ने सफाई दी है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री लगातार कार्यक्रमों में जाते हैं और जरूरत के अनुसार पार्टी कार्यालय में भी मौजूद रहते हैं।

“मुख्यमंत्री सुबह से दोपहर तक कार्यक्रमों में रहते हैं। पार्टी कार्यालय में भी आते हैं। अगर 10 मिनट का ही काम है, तो उससे ज्यादा रुकने की जरूरत क्यों होगी?”
— संजय गांधी, विधान पार्षद, जदयू

विपक्ष का तंज

वहीं विपक्ष इस मुद्दे को लेकर हमलावर है। राजद प्रवक्ता एजाज अहमद का कहना है कि मुख्यमंत्री अब उस स्थिति में नहीं हैं कि वे आम लोगों या कार्यकर्ताओं से खुलकर संवाद कर सकें।

“सरकार अब अधिकारी और कुछ नजदीकी मंत्री चला रहे हैं। मुख्यमंत्री के अधिकांश कार्यक्रम ऑनलाइन हो गए हैं। ऑफलाइन कार्यक्रमों में सुरक्षा इतनी कड़ी रहती है कि कोई पास नहीं जा सकता।”
— एजाज अहमद, प्रवक्ता, राजद

विशेषज्ञों की राय

राजनीतिक विश्लेषक एन.के. चौधरी मानते हैं कि मुख्यमंत्री अपने व्यवहार को लेकर कई बार विवादों में आ चुके हैं, इसलिए अब वे चुनिंदा लोगों के बीच ही सीमित रह रहे हैं। उनका कहना है कि यह स्थिति बिहार की राजनीति के लिए शुभ संकेत नहीं है और मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

मीडिया से भी दूरी

हाल के दिनों में मुख्यमंत्री ने मीडिया से भी दूरी बना ली है। सीएम आवास के कार्यक्रम पहले की तरह लाइव नहीं होते। मुस्लिम महिला डॉक्टर के हिजाब से जुड़े विवाद के बाद यह दूरी और बढ़ी है। अब सरकार की बड़ी घोषणाएं सीधे सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की जा रही हैं।

कुल मिलाकर

कभी जनता के बीच रहने वाले नेता माने जाने वाले नीतीश कुमार अब सीधे संवाद से दूर होते नजर आ रहे हैं। फिलहाल जनता दरबार, खुली मुलाकात और कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क—तीनों ही ठप पड़े हैं। आने वाले समय में यह संवाद दोबारा बहाल होगा या नहीं, इस पर भी संशय बना हुआ है।


 

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