वॉशिंगटन/नई दिल्ली। एक बार फिर भारत पर टैरिफ का बोझ बढ़ा सकते हैं। हाल ही में उन्होंने एक ऐसे विधेयक को मंजूरी दी है, जिसके तहत रूस से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों पर भारी शुल्क लगाया जा सकेगा। यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो भारत पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगने की आशंका जताई जा रही है।
ट्रंप के इस कदम को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से संवेदनशील माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में और तल्खी आ सकती है। गौरतलब है कि भारत पहले से ही एशिया में सबसे अधिक टैरिफ दबाव झेल रहा है, जो करीब 50 फीसदी तक बताया जा रहा है। इसमें रूस से ऊर्जा खरीदने पर लगाया गया 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है।
अमेरिकी सीनेटर ने जानकारी दी है कि यह विधेयक अगले सप्ताह अमेरिकी संसद में पेश किया जाएगा। इसके बाद इस पर बहस और मतदान की प्रक्रिया शुरू होगी।
क्या है विधेयक में प्रावधान
रूस से तेल और अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों पर शुल्क लगाने वाले इस बिल का नाम ‘Sanctioning Russia Act, 2025’ है। प्रस्तावित कानून के मुताबिक, यदि कोई देश जानबूझकर रूसी मूल के यूरेनियम या पेट्रोलियम उत्पादों के व्यापार में शामिल पाया जाता है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकार होगा कि वह उस देश से आयात होने वाले सभी सामानों पर टैरिफ 500 फीसदी तक बढ़ा दें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बिल लागू होता है, तो इसका सीधा असर भारत के ऊर्जा आयात और अमेरिका को होने वाले निर्यात पर पड़ सकता है। इससे भारतीय कंपनियों की लागत बढ़ेगी और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा भी प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल भारत सरकार की ओर से इस प्रस्तावित विधेयक पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर इस पर करीबी नजर रखी जा रही है।


