
वॉशिंगटन/तेल अवीव: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सैन्य अभियान के पहले 24 घंटों में ही अमेरिका को लगभग 779 मिलियन डॉलर (करीब 6,900 करोड़ रुपये) का खर्च उठाना पड़ा है।
कैरियर स्ट्राइक ग्रुप पर रोजाना करोड़ों डॉलर का खर्च
NDTV की रिपोर्ट में Center for a New American Security (CNAS) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को संचालित करने में प्रतिदिन करीब 6.5 मिलियन डॉलर (लगभग 58 करोड़ रुपये) का खर्च आता है।
कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में दुनिया के सबसे बड़े विमानवाहक पोतों में से एक USS Gerald R. Ford जैसे जहाज शामिल होते हैं। हमलों से पहले अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में जेराल्ड आर. फोर्ड सहित दो विमानवाहक स्ट्राइक ग्रुप तैनात किए थे।
तैयारी पर भी सैकड़ों मिलियन डॉलर खर्च
रिपोर्ट के मुताबिक, हमले से पहले की सैन्य तैयारियों—जैसे लड़ाकू विमानों की रीपोजिशनिंग, नौसैनिक जहाजों की तैनाती और क्षेत्रीय सैन्य संसाधनों को सक्रिय करना—पर लगभग 630 मिलियन डॉलर (करीब 5,556 करोड़ रुपये) खर्च हुए।
प्रमुख राजकोषीय विश्लेषक Kent Smetters के हवाले से कहा गया है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो अमेरिका को कुल मिलाकर करीब 210 बिलियन डॉलर (लगभग 18.87 लाख करोड़ रुपये) तक का खर्च उठाना पड़ सकता है।
हमलों के बाद क्षेत्र में बढ़ा तनाव
शनिवार को अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया। इन हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल की राजधानी तेल अवीव पर मिसाइलें दागीं। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में अब तक करीब 800 लोगों की मौत होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, आधिकारिक आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
संभावित आर्थिक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा चलता है, तो इसका असर न केवल अमेरिका बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। तेल की कीमतों में उछाल और रक्षा खर्च में वृद्धि से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है।
नोट: यह खबर विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और विश्लेषणों पर आधारित है। आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत आंकड़ों का इंतजार किया जा रहा है।


