तमिलनाडु के निवेशकों ने किया मढ़ौरा चीनी मिल का निरीक्षण, पुनः संचालन की दिशा में बढ़ी उम्मीद

पटना | 15 मार्च बिहार में वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू कराने की दिशा में राज्य सरकार की पहल अब धीरे-धीरे जमीन पर दिखाई देने लगी है। इसी कड़ी में रविवार को तमिलनाडु के निवेशकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सारण जिले में स्थित ऐतिहासिक का दौरा कर मिल परिसर और वहां मौजूद आधारभूत संरचनाओं का विस्तृत निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान निवेशकों ने मिल परिसर की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया और यह समझने की कोशिश की कि मिल को दोबारा चालू करने के लिए किन-किन संसाधनों और संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय किसानों से भी मुलाकात कर गन्ना उत्पादन से जुड़ी समस्याओं, संभावनाओं और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की।

सात निश्चय–3 के तहत उद्योगों को पुनर्जीवित करने की पहल

राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू कराने और राज्य में नए उद्योगों को स्थापित करने की दिशा में काम तेज किया गया है। इसी योजना के तहत ‘समृद्ध उद्योग–सशक्त बिहार’ के लक्ष्य को लेकर गन्ना उद्योग विभाग लगातार प्रयास कर रहा है।

बताया जा रहा है कि राज्य सरकार की पहल पर तमिलनाडु के के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक , अध्यक्ष सेल्वा कुमार, उपाध्यक्ष श्री कृष्ण तथा ग्रुप ऑडिटर बिमलेंद्र मिश्रा ने गन्ना उद्योग विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर मढ़ौरा चीनी मिल का निरीक्षण किया। इस दौरान मिल की जमीन, भवन, मशीनरी के अवशेष और अन्य सुविधाओं का आकलन किया गया।

किसानों से भी की बातचीत

दौरे के क्रम में निवेशकों के प्रतिनिधिमंडल ने आसपास के गांवों के किसानों से मुलाकात की और गन्ना उत्पादन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। किसानों ने भी मिल के फिर से चालू होने की उम्मीद जताते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और गन्ना किसानों को अपनी फसल का बेहतर बाजार मिलेगा।

प्रतिनिधिमंडल ने खेतों में जाकर गन्ना फसल की स्थिति का भी अवलोकन किया और स्थानीय उत्पादन क्षमता के बारे में जानकारी ली।

ऐतिहासिक महत्व रखती है मढ़ौरा चीनी मिल

सारण जिले में स्थित मढ़ौरा चीनी मिल का ऐतिहासिक महत्व भी काफी खास रहा है। जानकारी के अनुसार, इस चीनी मिल की स्थापना वर्ष 1904 में ब्रिटिश शासन के दौरान की गई थी और यह बिहार ही नहीं, बल्कि देश की शुरुआती चीनी मिलों में से एक मानी जाती है।

हालांकि 1990 के दशक में यह मिल बंद हो गई और धीरे-धीरे यहां की मशीनरी व अन्य संसाधन भी जर्जर हो गए। लंबे समय से बंद पड़ी इस मिल के फिर से चालू होने की संभावना अब राज्य सरकार की पहल और निवेशकों की रुचि के कारण फिर से जागने लगी है।

अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ निरीक्षण

निरीक्षण के दौरान गन्ना उद्योग विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। इस दौरान सहायक ईखायुक्त वेदव्रत कुमार और ईख पदाधिकारी कोमर कानन ने निवेशकों को मिल की स्थिति और क्षेत्र में गन्ना उत्पादन से जुड़ी संभावनाओं के बारे में जानकारी दी।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, मढ़ौरा चीनी मिल का यह निरीक्षण बिहार में चीनी उद्योग के पुनर्जीवन और बाहरी निवेश को आकर्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि निवेश की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो इससे क्षेत्र के किसानों, मजदूरों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिल सकता है।

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