पश्चिमी चंपारण (बेतिया) | 25 फरवरी, 2026: इंडो-नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा एजेंसियों ने नशे के सौदागरों की कमर तोड़ दी है। पश्चिमी चंपारण जिले के सिकटा थाना क्षेत्र में एसएसबी (SSB) और स्थानीय पुलिस ने एक संयुक्त छापेमारी में 34 किलो 500 ग्राम चरस की बड़ी खेप बरामद की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की कीमत करीब 87.50 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने मौके से दो शातिर तस्करों को भी दबोचा है।
नेपाल से आ रही थी ‘मौत की खेप’, पुलिस ने बिछाया जाल
सिकटा पुलिस और एसएसबी को एक गुप्त सूचना मिली थी कि नेपाल के रास्ते बाइक से भारी मात्रा में मादक पदार्थों की तस्करी होने वाली है।
- एक्शन टीम: अपर थानाध्यक्ष निधि कुमारी और एसएसबी के सहायक कमांडेंट अविनाश पटेल के नेतृत्व में टीम ने शिकारपुर शेरवा टोला के पास मोर्चा संभाला।
- घेराबंदी: जैसे ही एक बाइक पर सवार दो संदिग्ध व्यक्ति वहां पहुँचे, जवानों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। तलाशी लेने पर उनके पास मौजूद बैग से 24 पैकेटों में भरी चरस बरामद हुई।
गिरफ्तार तस्करों की कुंडली: चंपारण के ही निकले सौदागर
पकड़े गए दोनों आरोपी इसी जिले के रहने वाले हैं और काफी समय से सुरक्षा एजेंसियों की नजर में थे:
- रामाज्ञा यादव (45 वर्ष): ग्राम बेहरा, थाना सिकटा।
- जनक लाल पटेल (55 वर्ष): ग्राम बेहरी, थाना सिकटा।
87 लाख की खेप: अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग
एसएसबी के सहायक कमांडेंट अविनाश पटेल की मौजूदगी में जब जब्त की गई सामग्री का वजन किया गया, तो वह 34 किलो 500 ग्राम निकली।
- बाजार मूल्य: तस्करी की दुनिया में इस चरस की कीमत 87 लाख 50 हजार रुपये बताई जा रही है।
- बरामदगी: चरस के साथ-साथ तस्करी में इस्तेमाल की गई बाइक और अन्य सामग्री भी जब्त कर ली गई है।
प्राथमिकी दर्ज, अब ‘आकाओं’ की तलाश
अपर थानाध्यक्ष निधि कुमारी ने बताया कि सहायक कमांडेंट के आवेदन पर सिकटा थाने में एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि नेपाल में इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड कौन है और बिहार में यह खेप कहाँ सप्लाई की जानी थी।
VOB का नजरिया: खुली सीमा और नशे का बढ़ता कारोबार
पश्चिमी चंपारण से सटी नेपाल की सीमा तस्करों के लिए ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनती जा रही है। चरस की इतनी बड़ी बरामदगी यह संकेत देती है कि बॉर्डर पर सुरक्षा सख्त होने के बावजूद तस्कर नए-नए रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं। एसएसबी और बिहार पुलिस की यह मुस्तैदी काबिल-ए-तारीफ है, लेकिन जरूरत इस पूरे ‘नेक्सस’ को जड़ से उखाड़ने की है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


