जयपुर/पटना | 01 मार्च, 2026: राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित शंकरा संस्थान में “सतत कृत्रिम बुद्धिमत्ता — जन, प्रकृति और प्रगति” विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस वैश्विक मंच पर तकनीक और नैतिकता के संगम की वकालत की गई। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल और पूर्व केंद्रीय मंत्री व वरिष्ठ नेता अश्विनी कुमार चौबे ने शिरकत कर युवाओं को तकनीक के मानवीय चेहरे से अवगत कराया।
पोखरण से ‘आत्मनिर्भर भारत’ तक का सफर
मुख्य अतिथि राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने अपने संबोधन में भारत की वैज्ञानिक यात्रा को याद किया।
- विरासत: उन्होंने 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि उसी दृढ़ संकल्प ने आज भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाया है।
- उद्देश्य: उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी विकास का लक्ष्य केवल तीव्र गति नहीं, बल्कि एक न्यायपूर्ण और उत्तरदायी समाज का निर्माण होना चाहिए।
अश्विनी कुमार चौबे का मंत्र: “अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे तकनीक”
विशिष्ट अतिथि अश्विनी कुमार चौबे का संबोधन इस सम्मेलन का मुख्य आकर्षण रहा। उन्होंने तकनीक को भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कारों से जोड़ते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कहीं:
- नैतिक संकल्प: उन्होंने कहा कि AI केवल एक कोडिंग या सॉफ्टवेयर नहीं है, बल्कि यह मानवता का नैतिक संकल्प होना चाहिए।
- अंत्योदय और AI: श्री चौबे ने जोर दिया कि तकनीक तभी सफल है जब वह समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाए। उन्होंने कृषि सुधार, ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य सेवाओं में AI के उपयोग की वकालत की।
- शंकरा संस्थान की सराहना: उन्होंने संस्थान को ‘शिक्षा को संस्कार’ से जोड़ने वाला राष्ट्रनिर्माण का केंद्र बताया और इसे ‘AI उत्कृष्टता केंद्र’ (Center of Excellence) के रूप में मान्यता मिलने पर बधाई दी।
पुरस्कारों की बौछार: ₹33 लाख की राशि और महिला सशक्तिकरण
सम्मेलन केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें प्रतिभा का सम्मान भी किया गया:
- विशाल भागीदारी: देश भर के 300 से अधिक संस्थानों के छात्रों ने हिस्सा लिया, जिससे परिसर ‘लघु भारत’ जैसा नजर आया।
- इनाम: 32 से अधिक विषयों की प्रतियोगिताओं के लिए कुल 33 लाख रुपये की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई।
- समावेशिता: छात्राओं की ‘पूर्ण महिला टीम’ के लिए विशेष पुरस्कार की व्यवस्था की गई, जो तकनीकी क्षेत्र में लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा संदेश है।
VOB का नजरिया: क्या AI बनेगा ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का आधार?
जयपुर का यह सम्मेलन एक महत्वपूर्ण सवाल छोड़ गया है—क्या हम ऐसी AI विकसित कर पाएंगे जो केवल लाभ के लिए नहीं, बल्कि प्रकृति और जन-कल्याण के लिए हो? अश्विनी कुमार चौबे का ‘नैतिक AI’ का विचार विशेष रूप से बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्यों के लिए प्रासंगिक है, जहाँ AI के माध्यम से खेती और ग्रामीण स्वास्थ्य में क्रांति लाई जा सकती है। शंकरा संस्थान जैसे केंद्रों से निकलने वाली यह ‘नैतिक पीढ़ी’ ही भविष्य के भारत की नींव रखेगी।


