पटना/नई दिल्ली, 25 मार्च 2026। बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। जनता दल (यूनाइटेड) के बांका से सांसद गिरधारी यादव की लोकसभा सदस्यता पर अब संकट गहराता दिख रहा है। खास बात यह है कि उनके खिलाफ आवाज पार्टी के भीतर से ही उठी है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।
पार्टी के ही सांसद ने उठाई कार्रवाई की मांग
जेडीयू के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में पार्टी के नेता दिलेश्वर कामत ने लोकसभा अध्यक्ष से गिरधारी यादव को अयोग्य ठहराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि गिरधारी यादव लगातार पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं, जो संसदीय मर्यादा और दलगत अनुशासन के खिलाफ है।
पहले भी मिल चुका है नोटिस
सूत्रों के अनुसार, गिरधारी यादव और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद नया नहीं है। पिछले वर्ष भी उनके विवादित बयानों को लेकर पार्टी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
उन्होंने उस समय विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे, जिसे पार्टी ने अनुशासनहीनता माना था।
चुनाव आयोग पर बयान बना विवाद की वजह
गिरधारी यादव ने अपने बयान में कहा था कि यदि लोकसभा चुनाव के दौरान मतदाता सूची सही थी, तो कुछ ही महीनों बाद विधानसभा चुनाव के लिए वह गलत कैसे हो सकती है। उन्होंने चुनाव आयोग की टाइमिंग और प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे।
जेडीयू ने इसे संवेदनशील मुद्दे पर गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी बताते हुए कहा था कि इस तरह के बयान से पार्टी की छवि प्रभावित होती है।
पारिवारिक राजनीतिक गतिविधियां भी बनीं कारण
गिरधारी यादव के खिलाफ असंतोष का एक बड़ा कारण उनके परिवार की राजनीतिक भूमिका भी रही है। उनके बेटे चाणक्य प्रकाश ने विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के टिकट पर बेलहर सीट से चुनाव लड़ा था, जबकि यह सीट जेडीयू के हिस्से में थी।
इस घटनाक्रम को पार्टी ने अनुशासन के खिलाफ माना और इससे संगठन के भीतर नाराजगी बढ़ी।
अब बढ़ सकता है संकट
दिलेश्वर कामत द्वारा लोकसभा अध्यक्ष से की गई शिकायत के बाद अब मामला औपचारिक कार्रवाई की ओर बढ़ सकता है। यदि इस पर संज्ञान लिया जाता है, तो गिरधारी यादव की सदस्यता पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
हालांकि, अभी तक जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पार्टी के अंदर इस मुद्दे पर गहन मंथन जारी है।
राजनीतिक संदेश भी हो सकता है स्पष्ट
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी इस मामले में सख्त कदम उठाती है, तो यह अन्य नेताओं के लिए भी अनुशासन का स्पष्ट संदेश होगा। वहीं, गिरधारी यादव के लिए यह घटनाक्रम उनकी राजनीतिक पारी का अहम मोड़ साबित हो सकता है।
निष्कर्ष:
जेडीयू के भीतर उभरा यह विवाद बिहार की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत दे रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी नेतृत्व इस मामले में क्या फैसला लेता है और इसका आगामी राजनीतिक घटनाक्रम पर क्या असर पड़ता है।


