
Arvind Kejriwal और राघव चड्ढा के बीच बढ़ती खींचतान ने Aam Aadmi Party में गहरे संकट के संकेत दे दिए हैं। राज्यसभा में उपनेता पद से हटाए जाने के बाद अब उन्हें बोलने से रोकने की कोशिश ने सियासी हलचल तेज कर दी है।
पार्टी से निकालना आसान, असर संभालना मुश्किल
नियमों के मुताबिक, अगर राघव चड्ढा को पार्टी से निकाल भी दिया जाए, तो उनकी राज्यसभा सदस्यता खत्म नहीं होगी। वे ‘अनअटैच्ड’ सांसद बनकर पार्टी के खिलाफ खुलकर बोल सकते हैं, जो Arvind Kejriwal के लिए बड़ा राजनीतिक जोखिम है।
सदस्यता खत्म करने का क्या है नियम?
सांसद की सदस्यता तभी जा सकती है जब:
- वह खुद पार्टी से इस्तीफा दे
- या सदन में व्हिप के खिलाफ वोट करे
यही वजह है कि पार्टी उन्हें निकालने के बजाय ‘किनारे’ करने की रणनीति पर चल रही है।
AAP की रणनीति: ‘साइडलाइन’ करना
Aam Aadmi Party ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर चड्ढा को बोलने का समय न देने की मांग की है। यह संकेत है कि पार्टी उन्हें सीधे हटाने के बजाय धीरे-धीरे प्रभावहीन करना चाहती है।
केजरीवाल की बड़ी मजबूरियां
- इनसाइडर फैक्टर: Raghav Chadha पार्टी की अंदरूनी रणनीतियों से वाकिफ हैं
- पंजाब समीकरण: वे पंजाब से सांसद हैं, जहां पार्टी की सरकार है
- राज्यसभा का गणित: एक सांसद कम होने से संख्या और ताकत प्रभावित होगी
- विक्टिम कार्ड: निकालने पर चड्ढा ‘पीड़ित’ बन सकते हैं
क्यों बढ़ीं दूरियां?
सूत्रों के अनुसार, दोनों के बीच मतभेद के कारण:
- अहम मौकों पर चुप्पी
- ‘पर्सनल ब्रांड’ पर ज्यादा फोकस
- संकट के समय दूरी
आगे क्या?
Aam Aadmi Party का यह अंदरूनी विवाद आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मोड़ ले सकता है। फिलहाल, नजर इस बात पर है कि क्या राघव चड्ढा कोई ऐसा कदम उठाते हैं जिससे उनकी सदस्यता पर असर पड़े या फिर पार्टी उन्हें पूरी तरह हाशिए पर ही रखती है।


