
भागलपुर/खरीक। रफ्तार के जुनून और नेशनल हाईवे-31 की बदहाली ने गुरुवार को एक और भयावह मंजर पेश किया। भागलपुर के नवगछिया पुलिस जिला अंतर्गत खरीक थाना क्षेत्र में खरीक चौक के पास एक गिट्टी लदे ट्रक और मिनी ट्रक के बीच आमने-सामने की ऐसी टक्कर हुई कि मौके पर मौजूद लोगों की रूह कांप गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि टकराते ही दोनों वाहनों के फ्यूल टैंक फट गए और देखते ही देखते हाईवे ‘अग्निपथ’ में तब्दील हो गया। इस हादसे में ट्रक का चालक आग की लपटों के बीच बुरी तरह झुलस गया, जिसे स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सुरक्षित बाहर निकाला। 2 अप्रैल 2026 की इस घटना ने एक बार फिर भागलपुर-खगड़िया मार्ग पर सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है।
रफ्तार का कहर: जब टकराते ही भभक उठे दो पहाड़ जैसे वाहन
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर का वक्त था और एनएच-31 पर वाहनों की आवाजाही सामान्य थी। भागलपुर की ओर से गिट्टी लदा एक ट्रक तेज रफ्तार में खगड़िया की ओर जा रहा था। जैसे ही ट्रक खरीक चौक के समीप पहुंचा, सामने से आ रहे एक मिनी ट्रक से उसकी सीधी भिड़ंत हो गई। प्रत्यक्षदर्शी मिथुन ने बताया कि टक्कर इतनी जोरदार थी कि उसकी आवाज करीब आधा किलोमीटर दूर तक सुनाई दी।
टक्कर के कुछ ही सेकंड के भीतर मिनी ट्रक और ट्रक के अगले हिस्से से आग की ऊंची लपटें उठने लगीं। ट्रक गिट्टी से लदा होने के कारण भारी था, जिससे टक्कर का प्रभाव और भी घातक हो गया। आग ने इतनी तेजी से विकराल रूप लिया कि दोनों वाहनों के केबिन कुछ ही मिनटों में राख के ढेर में तब्दील हो गए। काले धुएं का गुबार आसमान में कई किलोमीटर दूर से देखा जा सकता था, जिससे आसपास के ग्रामीणों में दहशत फैल गई।
ड्राइवर की जांबाजी और मौत से दो-दो हाथ
हादसे के वक्त ट्रक का चालक केबिन के भीतर ही फंस गया था। इंजन में लगी आग तेजी से उसकी ओर बढ़ रही थी। स्थानीय युवक और राहगीरों ने हिम्मत दिखाई और जलते हुए ट्रक के पास पहुंचकर किसी तरह चालक को बाहर खींचा। जब तक उसे निकाला गया, वह काफी हद तक झुलस चुका था। उसे तुरंत इलाज के लिए पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। मिनी ट्रक के चालक और खलासी ने कूदकर अपनी जान बचाई, हालांकि वे भी मामूली रूप से चोटिल हुए हैं।
हादसे के बाद आग इतनी भीषण थी कि स्थानीय लोग पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। खरीक चौक पर मौजूद लोगों ने बाल्टियों से पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन डीजल और मोबिल की वजह से लगी आग पर काबू पाना नामुमकिन साबित हुआ। जब तक फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची, तब तक दोनों वाहन पूरी तरह जलकर लोहे के कंकाल मात्र रह गए थे।
NH-31 पर दो घंटे तक लगा रहा महाजाम
इस भीषण दुर्घटना के बाद नवगछिया-खगड़िया मुख्य मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। देखते ही देखते खरीक चौक से लेकर कई किलोमीटर पीछे तक ट्रक, बस और निजी वाहनों का जाम लग गया। चूंकि दोनों वाहन सड़क के बीचों-बीच जल रहे थे, इसलिए पुलिस के लिए भी वहां पहुंचना चुनौतीपूर्ण था।
खरीक थाना पुलिस ने सूचना मिलते ही मोर्चा संभाला। आग बुझने के बाद क्रेन की मदद से जले हुए वाहनों को सड़क के किनारे करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इस दौरान करीब दो घंटे तक यात्रियों को भीषण गर्मी में परेशान होना पड़ा। पुलिस ने डायवर्जन के जरिए छोटे वाहनों को निकालने की कोशिश की, लेकिन भारी वाहनों के कारण स्थिति सामान्य होने में काफी समय लगा।
खरीक चौक बना ‘ब्लैक स्पॉट’? (विशेष विश्लेषण)
VOB की विश्लेषण शैली में देखें तो खरीक चौक और इसके आसपास का एनएच-31 का हिस्सा अब एक ‘ब्लैक स्पॉट’ बनता जा रहा है। पिछले छह महीनों में इस क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं जिन पर प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है:
- ओवरलोडिंग का खेल: गिट्टी लदे ट्रकों में क्षमता से अधिक माल लदा होता है, जिससे तेज रफ्तार में ब्रेक लगाने पर चालक नियंत्रण खो देते हैं।
- अवैध कट और अतिक्रमण: खरीक चौक के पास हाईवे पर कई अवैध कट बना दिए गए हैं, जहां से अचानक बाइक या छोटे वाहन सामने आ जाते हैं, जिससे बचने के चक्कर में बड़े ट्रक आपस में टकरा जाते हैं।
- स्ट्रीट लाइट और साइन बोर्ड का अभाव: रात तो छोड़िए, दिन में भी इस व्यस्त चौराहे पर यातायात को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त साइन बोर्ड या सिपाही तैनात नहीं रहते।
- फायर सेफ्टी की कमी: एनएच-31 जैसे व्यस्त मार्ग पर, जहां हजारों तेल टैंकर और मालवाहक ट्रक गुजरते हैं, खरीक या नवगछिया में तत्काल रिस्पांस देने वाली फायर ब्रिगेड की कमी है। अगर आज आग और भी विकराल होती, तो आसपास की दुकानों को भी अपनी चपेट में ले सकती थी।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और आगे की जांच
घटना के बाद नवगछिया पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि वाहनों को जब्त कर लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि क्या दुर्घटना किसी तकनीकी खराबी के कारण हुई या ओवरटेकिंग के चक्कर में यह हादसा हुआ। घायल चालक के बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है।
प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब इन हादसों को रोकना है। स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि खरीक चौक पर स्पीड ब्रेकर या ट्रैफिक सिग्नल की व्यवस्था की जाए। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि वे एनएचएआई (NHAI) के साथ मिलकर इस खतरनाक मोड़ के सुदृढ़ीकरण पर चर्चा करेंगे।
किसकी है लापरवाही?
हादसे के लिए केवल चालकों को दोष देना उचित नहीं होगा। हाईवे की बनावट और वहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी भी उतनी ही जिम्मेदार है। जब गिट्टी लदे ट्रक भागलपुर से खगड़िया की ओर निकलते हैं, तो उनकी रफ्तार पर लगाम लगाने के लिए रास्ते में कोई प्रभावी मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं है। दूसरी ओर, खरीक चौक जैसे व्यस्त इलाके में वाहनों की गति सीमा तय न होना भी प्रशासन की विफलता को दर्शाता है।
समाधान की तलाश
खरीक में हुई यह टक्कर केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। अगर समय रहते एनएच-31 पर सुरक्षा मानकों को दुरुस्त नहीं किया गया, तो भविष्य में और भी बड़े जान-माल के नुकसान की आशंका बनी रहेगी। ट्रक चालक की जान तो बच गई, लेकिन उसकी झुलसी हुई देह और जलकर राख हुए ट्रक इस बात का सबूत हैं कि बिहार की सड़कों पर अभी बहुत कुछ सुधारना बाकी है।
द वॉयस ऑफ बिहार की टीम अपील करती है कि वाहन चलाते समय गति सीमा का पालन करें और ओवरटेकिंग से बचें। प्रशासन को भी चाहिए कि वह केवल कागजों पर ‘ब्लैक स्पॉट’ न गढ़े, बल्कि धरातल पर सुधार के ठोस कदम उठाए। खरीक की यह आग बुझ चुकी है, लेकिन सुरक्षा के सवालों की तपिश अभी बाकी है।


