इंडो-नेपाल बॉर्डर सड़क: बिहार के 7 जिलों को मिलेगी नई लाइफलाइन, 554 KM लंबी परियोजना का 95% कार्य पूरा; मई तक डेडलाइन

द वॉयस ऑफ बिहार | पटना/डेस्क

​बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा और विकास को नई ऊंचाई देने वाली बहुप्रतीक्षित इंडो-नेपाल बॉर्डर सड़क परियोजना अब अपने अंजाम पर है। पश्चिम चंपारण के मदनपुर से शुरू होकर किशनगंज के गलगलिया तक जाने वाली इस सामरिक सड़क का 95 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा कर लिया गया है। पथ निर्माण विभाग के सचिव श्री पंकज कुमार पाल ने परियोजना की समीक्षा करते हुए इसे मई 2026 तक हर हाल में पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

₹5865 करोड़ की लागत, 554 किलोमीटर का सफर

​करीब 5865 करोड़ रुपये की लागत से बन रही यह केंद्रीय परियोजना बिहार के उत्तरी छोर की तस्वीर बदल देगी।

  • वर्तमान स्थिति: कुल 554 किलोमीटर में से 529 किलोमीटर से अधिक सड़क का निर्माण पूर्ण हो चुका है।
  • पुल-पुलिया का जाल: अब तक 808 पुलिया और 129 पुलों का निर्माण संपन्न हो चुका है। शेष स्ट्रक्चरल कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा किया जा रहा है।

इन 7 जिलों को होगा सीधा फायदा

​यह सड़क इंडो-नेपाल सीमा से सटे बिहार के सात प्रमुख जिलों को एक सूत्र में पिरोएगी:

  1. ​पश्चिम चंपारण
  2. ​पूर्वी चंपारण
  3. ​सीतामढ़ी
  4. ​मधुबनी
  5. ​सुपौल
  6. ​अररिया
  7. ​किशनगंज

सुरक्षा और समृद्धि का ‘महासंगम’

​सचिव श्री पंकज कुमार पाल ने बैठक के दौरान इस सड़क के दोहरे महत्व पर प्रकाश डाला:

  • सामरिक सुरक्षा: यह सड़क सीमा सुरक्षा बल (SSB) की चौकियों को आपस में जोड़ते हुए सेना और सुरक्षा बलों की आवाजाही को तेज और सुगम बनाएगी। इससे सीमा पर अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण पाना आसान होगा।
  • आर्थिक विकास: सीमावर्ती गांवों को मुख्यधारा से जोड़ते हुए यह सड़क शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि उत्पादों के निर्बाध परिवहन के लिए सीधा मार्ग उपलब्ध कराएगी।

बाधाएं होंगी दूर: पूर्वी चंपारण में भू-अर्जन पर विशेष ध्यान

​समीक्षा के दौरान पूर्वी चंपारण जिले में भू-अर्जन (Land Acquisition) से जुड़ी कुछ समस्याएं सामने आईं। सचिव ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि वे जिला प्रशासन के साथ मिलकर इन बाधाओं को तुरंत दूर करें। भू-अर्जन पदाधिकारी को स्वयं स्थल पर जाकर मामलों को सुलझाने का निर्देश दिया गया है ताकि शेष 25 किलोमीटर का कार्य समय पर पूरा हो सके।

द वॉयस ऑफ बिहार का विश्लेषण: क्यों अहम है गलगलिया-मदनपुर मार्ग?

​यह केवल एक सड़क नहीं, बल्कि उत्तर बिहार के लिए एक ‘इकोनॉमिक कॉरिडोर’ है। इसके पूर्ण होने से नेपाल के साथ होने वाले व्यापार को गति मिलेगी और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के उत्पाद सीधे बड़े बाजारों तक पहुंच सकेंगे। सुरक्षा के नजरिए से भी यह हिमालयी सीमा पर भारत की पकड़ को और मजबूत करेगा।

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