यमन में भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की फांसी फिलहाल टली, अंतिम क्षणों में मिली राहत

भारत के कूटनीतिक प्रयास और धार्मिक हस्तक्षेप से टली मौत की सजा

नई दिल्ली/सना, 16 जुलाई 2025 — यमन की राजधानी सना की जेल में बंद भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की मौत की सजा पर फिलहाल अमल रोक दिया गया है। बुधवार को उन्हें फांसी दिए जाने की संभावना थी, लेकिन निर्धारित समय से 24 घंटे पहले उनकी सजा पर अस्थायी रोक लगा दी गई। यह राहत भारत सरकार, परिजनों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार चल रहे कूटनीतिक और मानवीय प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है।

क्या है पूरा मामला

केरल के पलक्कड़ जिले के कोल्लेंगोडे की रहने वाली निमिषा प्रिया पर जुलाई 2017 में यमन के एक नागरिक की हत्या का आरोप लगा था। 2020 में यमन की अदालत ने उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। नवंबर 2023 में यमन की सर्वोच्च न्यायिक परिषद ने उनकी अपील खारिज कर दी थी। वर्तमान में 38 वर्षीय यह भारतीय नर्स यमन की राजधानी सना की जेल में बंद हैं, जो ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले क्षेत्र में स्थित है।

कोर्ट के बाहर समझौते की कोशिश

निमिषा के परिजन लगातार प्रयासरत हैं कि मृतक के परिजनों से “दिया” (रक्तमूल्य) के आधार पर समझौता हो जाए। इस्लामिक कानून के तहत कुछ मामलों में मृतक के परिजन क्षमा कर सकते हैं, यदि उन्हें आर्थिक या मानवीय संतोष मिले। इसी दिशा में भारतीय दूतावास और सामाजिक संगठनों की मदद से कोर्ट के बाहर आपसी सहमति की कोशिशें चल रही हैं।

भारत सरकार की सक्रियता

विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और निमिषा को हर संभव कानूनी सहायता दी जा रही है। भारतीय पक्ष ने यमन के अभियोजन विभाग और जेल प्रशासन से भी संपर्क साधा है ताकि एक अंतिम समाधान तक पहुँचा जा सके।

धार्मिक हस्तियों की भी भूमिका

निमिषा प्रिया के मामले को लेकर धार्मिक और सामाजिक स्तर पर भी पहल हुई है। यमन के प्रमुख सूफी धर्मगुरु शेख हबीब उमर बिन हाफिज और भारत के प्रसिद्ध सुन्नी नेता कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार के बीच संवाद स्थापित हुआ। इस प्रयास के तहत यमन के धमार शहर में मृतक के परिवार और शेख उमर के प्रतिनिधियों के बीच एक बैठक भी हुई, जिसमें मृतक के निकटतम रिश्तेदार भी शामिल हुए। माना जा रहा है कि इसी पहल के बाद फांसी पर रोक संभव हो सकी।

क्या आगे हो सकता है

मौजूदा स्थिति में यह कहना मुश्किल है कि यह राहत स्थायी है या अस्थायी। हालांकि, यह स्पष्ट है कि भारत के कानूनी, कूटनीतिक और सामाजिक प्रयासों का असर दिखने लगा है। यदि मृतक का परिवार माफीनामा देने को तैयार हो जाता है, तो निमिषा की जान बच सकती है।


विशेष टिप्पणी:
निमिषा प्रिया का मामला कानूनी के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत संवेदनशील है। यह भारत और यमन के बीच मानवाधिकार आधारित कूटनीति का एक उदाहरण बन सकता है।


 

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