भारत-अमेरिका डील पर ‘संग्राम’: 12 फरवरी को भारत बंद का ऐलान; रूस से तेल नहीं खरीदेगा इंडिया, 5 साल में अमेरिका को देने होंगे 500 अरब डॉलर

नई दिल्ली | प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच 6 फरवरी को हुए ऐतिहासिक समझौते पर देश में ‘आर-पार’ की लड़ाई शुरू हो गई है। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने इस समझौते को देशहित के खिलाफ बताते हुए 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल (Nationwide Strike) का आह्वान किया है।

विरोध क्यों? “अमेरिकी दबाव के आगे घुटने टेक दिए”

​विपक्षी नेताओं और किसान समूहों का आरोप है कि सरकार ने अमेरिकी दबाव के आगे सरेंडर कर दिया है।

  • हड़ताल: 12 फरवरी को चक्का जाम और प्रदर्शन की तैयारी है।
  • आरोप: विपक्ष का कहना है कि यह समझौता किसानों और आम जनता की कमर तोड़ देगा। वहीं, भाजपा इसे भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ‘मील का पत्थर’ बता रही है।

समझौते की 3 बड़ी बातें: क्या खोया, क्या पाया?

​इस डील में भारत को कुछ फायदा मिला है, तो कुछ बड़ी शर्तें भी माननी पड़ी हैं:

  1. राहत (टैरिफ घटा): अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले टैक्स (Tariff) को 50% से घटाकर 18% कर दिया है। इससे भारतीय निर्यातकों को फायदा होगा।
  2. शर्त (रूस से तेल बंद): भारत ने वादा किया है कि वह अब रूस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेल आयात बंद कर देगा।
  3. सौदा (500 अरब डॉलर): अगले 5 सालों में भारत को अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदना होगा। इसमें ऊर्जा, तकनीक और कृषि उत्पाद शामिल हैं।

क्या होगा असर?

​जानकारों का मानना है कि रूस से सस्ता तेल बंद होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जबकि कृषि उत्पादों के आयात से भारतीय किसानों पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि किसान संगठन सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं।

नई दिल्ली | प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच 6 फरवरी को हुए ऐतिहासिक समझौते पर देश में ‘आर-पार’ की लड़ाई शुरू हो गई है। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने इस समझौते को देशहित के खिलाफ बताते हुए 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल (Nationwide Strike) का आह्वान किया है।

विरोध क्यों? “अमेरिकी दबाव के आगे घुटने टेक दिए”

​विपक्षी नेताओं और किसान समूहों का आरोप है कि सरकार ने अमेरिकी दबाव के आगे सरेंडर कर दिया है।

  • हड़ताल: 12 फरवरी को चक्का जाम और प्रदर्शन की तैयारी है।
  • आरोप: विपक्ष का कहना है कि यह समझौता किसानों और आम जनता की कमर तोड़ देगा। वहीं, भाजपा इसे भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ‘मील का पत्थर’ बता रही है।

समझौते की 3 बड़ी बातें: क्या खोया, क्या पाया?

​इस डील में भारत को कुछ फायदा मिला है, तो कुछ बड़ी शर्तें भी माननी पड़ी हैं:

  1. राहत (टैरिफ घटा): अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले टैक्स (Tariff) को 50% से घटाकर 18% कर दिया है। इससे भारतीय निर्यातकों को फायदा होगा।
  2. शर्त (रूस से तेल बंद): भारत ने वादा किया है कि वह अब रूस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेल आयात बंद कर देगा।
  3. सौदा (500 अरब डॉलर): अगले 5 सालों में भारत को अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदना होगा। इसमें ऊर्जा, तकनीक और कृषि उत्पाद शामिल हैं।

क्या होगा असर?

​जानकारों का मानना है कि रूस से सस्ता तेल बंद होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जबकि कृषि उत्पादों के आयात से भारतीय किसानों पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि किसान संगठन सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं।

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