द वॉयस ऑफ बिहार | नई दिल्ली (19 फरवरी 2026)
वैश्विक खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भारत ने एक और बड़ा कदम उठाया है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) और संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने दुनिया भर में भूख से लड़ने के लिए एक पांच-वर्षीय चावल आपूर्ति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता वैश्विक मानवीय अभियानों में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।
2,00,000 मीट्रिक टन चावल की होगी आपूर्ति
18 फरवरी, 2026 को हुए इस समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत भारत दुनिया के सबसे कमजोर और जरूरतमंद लोगों तक पोषण पहुंचाएगा।
- आपूर्ति का लक्ष्य: FCI द्वारा WFP को कुल 2,00,000 मीट्रिक टन चावल उपलब्ध कराया जाएगा।
- चावल की गुणवत्ता: इस आपूर्ति में अधिकतम 25% टूटा हुआ चावल शामिल होगा।
- समझौते की अवधि: यह एमओयू अगले 5 वर्षों तक वैध रहेगा, जिसे आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
प्रमुख बिंदुओं पर एक नजर
इस ऐतिहासिक समझौते पर FCI के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रवींद्र कुमार अग्रवाल और WFP के उप-कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काउ ने हस्ताक्षर किए।
- कीमत का निर्धारण: चावल का मूल्य प्रतिवर्ष आपसी सहमति से तय होगा।
- वर्तमान दर: 31 मार्च 2026 तक के लिए चावल की कीमत 2,800 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है।
- शून्य भूख का लक्ष्य: यह साझेदारी संयुक्त राष्ट्र के ‘शून्य भूख’ (Zero Hunger) के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक ठोस कदम है।
“आशा और पोषण पहुंचा रहा भारत”
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव श्री संजीव चोपड़ा ने इस मौके पर कहा कि भारत किसी को भी भूखा न रहने देने के अपने संकल्प पर दृढ़ है। उन्होंने कहा, “हम भूख से जूझ रहे लोगों तक केवल अनाज नहीं, बल्कि आशा, पोषण और सम्मान पहुंचा रहे हैं।”
वहीं, डब्ल्यूएफपी के उप-कार्यकारी निदेशक श्री कार्ल स्काउ ने भारत को धन्यवाद देते हुए कहा कि एक प्रमुख कृषि राष्ट्र के रूप में भारत का यह सहयोग वैश्विक एकजुटता का एक बड़ा उदाहरण है।
वैश्विक पटल पर भारत की धमक
यह साझेदारी विश्व भर की मानवीय जरूरतों को पूरा करने में भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है। अब भारत न केवल अपनी विशाल आबादी का पेट भर रहा है, बल्कि वैश्विक खाद्य प्रणालियों में एक विश्वसनीय और जिम्मेदार योगदानकर्ता के रूप में उभरकर सामने आया है।
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