राजधानी पटना में शुक्रवार को Deva Gupta को स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी पाटलिपुत्र थाना क्षेत्र स्थित राधिका अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 303 से हुई।
हालांकि उनके वकील का दावा है कि शाम करीब 6 बजे उन्हें छोड़ दिया गया, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि एसटीएफ ने इनामी अपराधी को गिरफ्तार करने के बाद क्यों रिहा किया।
वकीलों का बयान
देवा गुप्ता के अधिवक्ता नीलांजन चटर्जी और कुमारेश सिंह ने बताया कि यह गिरफ्तारी पटना हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। 24 दिसंबर 2025 को आपराधिक रिट याचिका संख्या 3330/2025 में हाईकोर्ट ने देवा गुप्ता की गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। राज्य सरकार ने इस रोक का विरोध किया था, लेकिन कोर्ट का स्टे ऑर्डर अभी भी प्रभावी था।
वकीलों ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी अदालत के आदेश की जानकारी होने के बावजूद की गई और आरोपी को छोड़ा गया। उन्होंने इसे न्यायालय की अवमानना बताया।
एक लाख रुपये का इनाम
मोतिहारी के एसपी स्वर्ण प्रभात ने देवा गुप्ता को कुख्यात अपराधी के रूप में चिन्हित किया था और उनके ऊपर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
गंभीर आपराधिक मामले
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार देवा गुप्ता के खिलाफ 28 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, रंगदारी, जमीन कब्जा और अन्य संगीन अपराध शामिल हैं। बताया जाता है कि दो मामले लंबे समय से लंबित थे और पुलिस लगातार उनकी तलाश कर रही थी।
टॉप-100 हिट लिस्ट में पहले स्थान पर
जिले में अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस ने 100 अपराधियों की विशेष सूची तैयार की थी, जिसे डीआईजी को अनुमोदन के लिए भेजा गया। इस ‘टॉप-100 हिट लिस्ट’ में देवा गुप्ता का नाम पहले स्थान पर था। हालांकि, हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर के कारण गिरफ्तारी के तुरंत बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
इस घटनाक्रम ने कानून और व्यवस्था, न्यायिक स्टे ऑर्डर और एसटीएफ के कार्रवाई के बीच संतुलन पर सवाल खड़ा कर दिया है।


