मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक ऐसी खौफनाक खबर सामने आई है जिसने न केवल पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी तार-तार कर दिया है। मड़वन के चैनपुर पड़री गांव से पिछले एक सप्ताह से लापता 7 वर्षीय मासूम ऋषिकेश कुमार का सड़ा-गला शव रविवार सुबह गांव के ही चौर (निचले इलाके) से बरामद हुआ। हत्यारों ने मासूम को मारने से पहले जिस तरह की बर्बरता दिखाई, उसे सुनकर रूह कांप जाए।
क्रूरता की पराकाष्ठा: शव की हालत देख कांप गए ग्रामीण
ऋषिकेश पिछले रविवार को घर से खेलने निकला था और तभी से लापता था। परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। रविवार सुबह जब चौर में खोदे गए एक गड्ढे से दुर्गंध आई, तो मिट्टी हटाने पर मासूम का शव मिला।
- बर्बरता के निशान: हत्यारों ने बच्चे के हाथ और पैर के पंजे काट दिए थे।
- घाव: मासूम की गर्दन रेती हुई थी और शरीर की नसें कटी मिलीं। पूरे शरीर पर जख्म के अनगिनत निशान थे, जो यह बताते हैं कि हत्या से पहले उसे असहनीय पीड़ा दी गई।
- साक्ष्य छुपाने की कोशिश: हत्या के बाद शव को पहचान मिटाने और साक्ष्य छुपाने की नीयत से गहरे गड्ढे में दबा दिया गया था।
पुलिस छावनी में तब्दील हुआ गांव; जाँच में जुटीं टीमें
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए एसडीपीओ सरैया गरिमा के नेतृत्व में कई थानों की पुलिस मौके पर पहुँची।
- मल्टी-एजेंसी जाँच: करजा, पानापुर और कांटी थाने की पुलिस के साथ-साथ डॉग स्क्वायड और एफएसएल (FSL) की टीम ने घटनास्थल से मिट्टी और खून के नमूने लिए हैं।
- आक्रोश: शव मिलने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोग अपराधियों की अविलंब गिरफ्तारी और उन्हें कड़ी सजा देने की मांग कर रहे हैं।
त्वरित अवलोकन (Quick Facts)
- पीड़ित: ऋषिकेश कुमार (उम्र 7 वर्ष)।
- स्थान: चैनपुर पड़री गांव, करजा थाना क्षेत्र (मुजफ्फरपुर)।
- लापता होने की अवधि: करीब 10 दिन।
- शव की स्थिति: गला रेता हुआ, हाथ-पैर के पंजे कटे और शरीर मिट्टी में दबा हुआ।
- मुख्य अधिकारी: एसडीपीओ सरैया गरिमा।
VOB का नजरिया: क्या समाज ‘असुर’ बनता जा रहा है?
एक 7 साल के मासूम के साथ ऐसी दरिंदगी किसी सामान्य अपराधी का काम नहीं हो सकता। जिस तरह से पंजे काटे गए और गला रेता गया, यह किसी गहरी रंजिश या विकृत मानसिकता की ओर इशारा करता है। बिहार में बच्चों के प्रति बढ़ते अपराध एक गंभीर चिंता का विषय हैं। मुजफ्फरपुर पुलिस के लिए यह केवल एक मर्डर केस नहीं, बल्कि अपनी साख बचाने की चुनौती है। आखिर कौन थे वो ‘नरपिशाच’ जिन्होंने एक खिलते हुए फूल को इतनी बेरहमी से मसल दिया?


